मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय पतंगोत्सव – 2026 को संबोधित किया। इस अवसर पर दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। गृह मंत्री अमित शाह ने देशभर के सभी लोगों, विशेष रूप से किसानों, को मकर संक्रांति, पोंगल, लोहड़ी, माघ बिहू और उत्तरायण की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उत्तरायण का पर्व पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। यह पर्व इसलिए खुशी का पर्व है क्योंकि हमारा ऋतु चक्र और हमारा जीवन असीम ऊर्जा के स्रोत भगवान सूर्यनारायण पर निर्भर होता है। उन्होंने कहा कि महाकवि कालिदास जी ने भारतवासियों के लिए कहा था – ‘उत्सवप्रियाः खलु मनुष्याः’, यानी भारत के लोग उत्सवप्रिय होते हैं। हर ऋतु में देश के अलग-अलग हिस्सों में उत्सवों का आयोजन किया जाता है। हम उत्सवों के माध्यम से पूरे समाज को एकजुट करके आगे बढ़ने की सोच रखते हैं, और उत्तरायण उसी का एक हिस्सा है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पतंगोत्सव को सतत प्रयासों से और अधिक लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पतंगोत्सव देश की जनता को दिल्ली से जोड़ेगा और आगे चलकर यह पूरे देश का उत्सव बन सकता है। उन्होंने कहा कि पतंगोत्सव को दिल्ली और समूचे देश में विस्तार देने तथा दिल्ली के पतंगोत्सव को इसका केन्द्र बनाने के लिए एक समिति गठित करनी चाहिए, जो इसे लोकप्रिय बनाने और इसमें जनभागीदारी बढ़ाने के पहलुओं पर काम करे। उन्होंने कहा कि अगला पतंगोत्सव ऐसा हो जिससे इस उत्सव का स्थान देश और दुनिया के प्रमुख पतंगोत्सवों में अग्रणी स्थानों में शामिल हो।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में देश के अलग-अलग किस्मों के बाँस से सुसज्जित सुंदर प्राकृतिक स्थान बाँसेरा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि यह उद्यान इस बात का परिचायक है कि यदि कोई व्यक्ति अपने संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए कृतनिश्चयी हो जाए, तो कैसे शानदार परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बांसेरा उद्यान का उपयोग बढ़ाने के लिए तथा दिल्ली के लोगों को इसकी ओर आकर्षित करने के लिए दिल्ली सरकार को यहाँ अच्छे आयोजन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यहाँ तीन पवेलियन हैं, जिनमें पतंगों का इतिहास और पतंगों का युद्धकालीन उपयोग भी प्रदर्शित किया गया है। जब साइमन कमीशन देश में आया था, तब उसका देश में जोरदार विरोध हुआ था। ‘Simon Go Back’ का नारा आजादी के आंदोलन का प्रतिघोष बन गया था। साइमन कमीशन का विरोध उत्तरायण के दिन ‘Simon Go Back’ लिखे पतंग उड़ाकर भी किया गया था। भारतीयों ने पतंगों से पूरा आकाश भर दिया था और अंग्रेजों को अपनी ताकत का परिचय दिया था। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मकर संक्रांति का उत्सव एक भारत, श्रेष्ठ भारत का प्रत्यक्ष उदाहरण बन चुका है। उन्होंने कहा कि सूर्य भगवान अपनी दिशा बदल रहे हैं और इसका स्वागत पूरे जगत में होता है। पंजाब और हरियाणा में हम इसे लोहड़ी के रूप में मनाते हैं, तमिलनाडु में पोंगल के रूप में, असम में माघ बिहू के रूप में, पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति के रूप में, गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तरायण के रूप में तथा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में खिचड़ी या संक्रांति खिचड़ी के नाम से मनाने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि यह पतंगोत्सव इन सभी राज्यों को दिल्ली से जोड़ने का एक प्रयास है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आने वाले दिनों में पतंगोत्सव दिल्ली में अपना एक विशेष स्थान बनाएगा और पूरे देश के पतंगबाजों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय पतंगबाजों को भी यहाँ आकर अपनी कला दिखाने का अवसर मिलेगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने गुजरात में 8 जनवरी से 11 जनवरी तक मनाए गए सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में हिस्सा लिया। सोमनाथ मंदिर पर पहले हमले के 1000 साल पूरे होने पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया गया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और कई अन्य सरकारों ने मिलकर देशभर में सोमनाथ स्वाभिमान वर्ष मनाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग सबसे पहला ज्योतिर्लिंग है। सोम समुद्र के किनारे स्थित प्रभु शिव के इस स्थान को 16 बार तोड़ने का प्रयास किया गया। वे तोड़ने में सफल हुए, मगर जितनी बार तोड़ा गया, उतनी बार ही इसे पुनः बनाया गया। श्री शाह ने कहा कि आजादी के बाद देश के लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, जामनगर के महाराजा जाम साहब, कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी और डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संकल्प लिया कि यहाँ फिर से भव्य और उत्कृष्ट श्री सोमनाथ मंदिर बनेगा। आज उस स्थान पर भव्य और उत्कृष्ट सोमनाथ मंदिर गगनचुंबी ध्वजा के साथ विद्यमान है। उन्होंने कहा कि यह इस बात का परिचायक है कि विध्वंस करने वालों से निर्माण करने वालों की शक्ति बहुत बड़ी होती है। इसे तोड़ने वाले—महमूद गजनवी, महमूद बेगड़ा, अलाउद्दीन खिलजी—आज दुनिया के नक्शे पर कहीं दिखाई नहीं देते, जबकि सोमनाथ मंदिर पूरी दुनिया के सामने सम्मान के साथ उसी स्थान पर खड़ा है। यह सनातन धर्म की अजर-अमरता और भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों की अमरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और सोमनाथ स्वाभिमान वर्ष सभी भारतीयों के लिए अपनी संस्कृति को अटल, अडिग और अमर बनाने के संकल्प का पुनः स्मरण कराने का अवसर है।
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