मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 सितंबर को एशविले में जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों (एफएमसीबीजी) की बैठक के दौरान विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बंगा से मुलाकात की। वित्त मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने भारत के साथ विश्व बैंक समूह के लगातार जुड़ाव की सराहना की और 1.5 बिलियन डॉलर की डेवलपमेंट पॉलिसी फाइनेंसिंग (डीपीएफ) की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए उनकी तारीफ की। वित्त मंत्री सीतारमण ने एसआईडीबीआई के जरिए एमएसएमई को आईएफसी से मिले सहयोग की भी सराहना की। इस प्रक्रिया को रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया और इसका एमएसएमई सेक्टर पर सकारात्मक असर पड़ा है। दोनों नेताओं ने भारत-विश्व बैंक समूह की साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। इसमें भारत में एमआईजीए की बड़ी भूमिका पर विचार करना भी शामिल था, ताकि गारंटी के व्यवस्थित इस्तेमाल और निजी पूंजी को ज्यादा जुटाकर कॉर्पोरेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और म्युनिसिपल बॉन्ड मार्केट को गहरा किया जा सके। बातचीत में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए क्रेडिट बढ़ाने के वास्ते सेक्टर-आधारित और प्रोग्राम-आधारित नजरिए पर भी चर्चा हुई। अजय बंगा ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में आए बड़े बदलाव की सराहना की। उन्होंने भारत के विकास के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विश्व बैंक समूह के साधनों का और बेहतर इस्तेमाल करने के मौकों पर भी ध्यान दिलाया, जिसमें एमआईजीए की भागीदारी और विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस शामिल है।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत में ‘ग्लोबल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर नॉलेज हब’ बनाने के लिए विश्व बैंक समूह के साथ भारत के जुड़ाव पर भी जोर दिया। इसमें खेती जैसे क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के मौकों पर विचार करना भी शामिल है। उन्होंने इसके लॉन्च की दिशा में जल्द प्रगति की उम्मीद जताई। केंद्रीय वित्त मंत्री ने नए भारत-विश्व बैंक समूह कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत विश्व-स्तरीय टूरिज्म डेस्टिनेशन विकसित करने पर भी चर्चा की। इसके लिए आईबीआरडी की पॉलिसी और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट, आईएफसी के निवेश और एमआईजीए की गारंटी को मिलाकर एक समन्वित नजरिया अपनाया जाएगा। दोनों नेताओं ने साझेदारी को पारंपरिक कर्जदाता-कर्जदार रिश्ते से आगे बढ़ाकर ग्लोबल नॉलेज, इनोवेशन और निजी पूंजी जुटाने के एक रणनीतिक प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने पर भी चर्चा की। इसमें भारत के बड़े पैमाने और काम करने की क्षमता को विश्व बैंक समूह की ग्लोबल विशेषज्ञता और फाइनेंसिंग साधनों के साथ जोड़ा जाएगा।
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