भारतीय रेल ने चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाही में अपने पूंजीगत व्यय का 80% से अधिक का उपयोग किया

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भारतीय रेल ने चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाही में अपने पूंजीगत व्यय का 80% से अधिक का उपयोग किया
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मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय रेल आधुनिक एवं बेहतर संपर्क परिकल्पना के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार संगठन में बदलकर सस्ती दर पर देश भर में तेज सुरक्षित और विश्व स्तरीय रेल सेवा यात्रा प्रदान कर रहा है। इस केंद्रित दृष्टिकोण के साथ, भारतीय रेल ने 2025-26 के लिए आवंटित सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) परिव्यय में मजबूत प्रवृत्ति बनाए रखी है। भारतीय रेल ने दिसंबर 2025 के अंत तक, 2,52,200 करोड़ रुपये की कुल सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) में से 80 दशमलव पांच चार प्रतिशत 2,03,138 करोड़ रुपये व्यय किए हैं जो पिछले वर्ष (दिसंबर 2024) की इसी अवधि की तुलना में जीबीएस उपयोग में 6 दशमलव पांच चार प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। ये व्यय मुख्य रूप से सुरक्षा उपायों, क्षमता वर्धन, बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं पर किए गए हैं। सुरक्षा श्रेणी में आवंटित धनराशि का 84 प्रतिशत उपयोग किया गया है। क्षमता वृद्धि के लिए आवंटित 1,09,238 करोड़ रुपये में से 76,048 करोड़ रुपये (69 प्रतिशत) खर्च किए गए हैं। ग्राहक सुविधाओं में 80 प्रतिशत आवंटित धन का उपयोग किया गया है। इसमें दिसंबर 2025 तक 9,575 करोड़ रुपये का व्यय शामिल है।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले एक दशक में पूंजीगत व्यय -कैपेक्स में निरंतरता से 164 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं, 30 अमृत भारत ट्रेन सेवाएं, स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच के कार्यान्वयन, ब्रॉड-गेज नेटवर्क के 99 प्रतिशत से अधिक विद्युतीकरण, और नई लाइनों, गेज रूपांतरण, ट्रैक दोहरीकरण, यातायात सुविधाओं, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में निवेश तथा महानगरीय परिवहन प्रणालियों से संबंधित व्यापक कार्य किए गए हैं। इन पहल से रेल यात्रा किफायती रहते हुए गति, सुरक्षा और यात्री सुविधा में काफी बढ़ोतरी हुई है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के शीघ्र परिचालन शुरू होने के बाद भारतीय रेल इस श्रेणी की लंबी दूरी की रेल यात्रा के रूपांतरण के लिए भी तैयार है। ये रुझान दर्शाते हैं कि रेल मंत्रालय की सकल बजटीय सहायता व्यय योजना पटरी पर है, और ढांचागत कार्य तेजी से निष्पादित हो रहे हैं। इनसे यह भी संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लक्ष्य पूर्णतया हासिल होने की संभावना है।

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