मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा है। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई के गर्वनर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने तटस्थ रुख अपनाते हुए सर्वसम्मति से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। स्टेंडिंग डिपोजिट फैसिलिटी रेट पांच प्रतिशत और मार्जनल स्टेंडिंग फैसिलिटी रेट तथा बैंक रेट को 5.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। गवर्नर की अध्यक्षता में समिति की बैठक सोमवार को शुरू हुई थी। मौद्रिक नीति समिति ने पिछले वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद-जीडीपी 7.6 प्रतिशत और चालू वित्त वर्ष के लिए 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आरबीआई के गर्वनर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ऊर्जा की लगातार बढ़ती कीमतें और संभावित अल नीनो की स्थिति से महंगाई बढ़ने की आशंका है।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष पर बदलती परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई ने स्थिति पर नजर रखने और उसके अनुसार कार्रवाई करने की नीति अपनाई है। मौद्रिक नीति समिति ने नीति दर को अपरिवर्तित रखने के लिए मतदान किया, हालांकि वह सतर्कता बनाए रखेगी, आने वाली सूचनाओं पर बारीकी से नजर रखेगी और जोखिमों के संतुलन का आकलन करेगी। गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष से वृद्धि पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई और बीमा लागतों से जुड़ी उच्च इनपुट लागतों के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान से कच्चे माल को इस्तेमाल करके तैयार उत्पाद बनाने वाले क्षेत्रों के लिए प्रमुख कच्चे माल की उपलब्धता सीमित हो सकती है। इससे वृद्धि बाधित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी आधार मजबूत हैं, जिससे यह अतीत की तुलना में प्रतिकूल प्रभावों का सामना करने में अधिक सक्षम है। उन्होंने कहा कि निर्यात को समर्थन देने और आपूर्ति श्रृंखलाओं की रक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कई उपायों से संघर्ष के प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सकेगा। आरबीआई के गर्वनर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मजबूत व्यापक आर्थिक आधारभूत स्थितियों के बावजूद, वर्ष 2025-26 में भारतीय रुपया पिछले वर्षों के औसत की तुलना में अधिक कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि विनिमय दर नीति अपरिवर्तित रहेगी। आरबीआई के गर्वनर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह दीर्घकालिक नीति के अनुरूप है जिसके अनुसार विनिमय दरें बाजार द्वारा निर्धारित होती हैं।
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