मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने शहर के भागीरथपुरा इलाके में हाल हुई जल प्रदूषण की घटना की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया है। इस आयोग में उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को शामिल किया गया है। अदालत ने कहा कि स्थिति के लिए तत्काल न्यायिक जांच और संकट के मूल कारण का पता लगाने के लिए एक स्वतंत्र, विश्वसनीय प्राधिकरण द्वारा जांच आवश्यकता है। आयोग को कार्यवाही शुरू होने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर अंतरिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने यह आयोग कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान गठित किया। ये याचिकाएं भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत के मामलों से जुड़ी हैं। सरकार ने अदालत के समक्ष भागीरथपुरा में मौजूदा गैस्ट्रोएंटेराइटिस महामारी से हुई 23 मौतों की एक ऑडिट रिपोर्ट पेश की, जिसमें संकेत दिया गया कि इनमें से 16 मौतें दूषित उल्टी और दस्त के बीमारी से जुड़ी हो सकती हैं, जो दूषित पेयजल के कारण फैली। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सीवेज का पानी मिलना, पाइपलाइन में रिसाव और नागरिक निकायों द्वारा पीने योग्य पानी के मानकों को बनाए रखने में विफलता के कारण जल जनित बीमारियों का प्रकोप फैला।
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