मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अयोध्या में देवनागरी लिपि में लिखी गई एक दुर्लभ पांडुलिपि मिली है, जिसके लगभग 200 साल पुरानी होने का अनुमान है। इसे जल्द ही संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय को सौंप दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक संजीव कुमार सिंह ने कहा कि यह पांडुलिपि 150 से 200 साल पुरानी हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि नागरी से देवनागरी में विकसित हुई यह लिपि, आधुनिक लेखन की तुलना में अक्षर निर्माण में भिन्नता दर्शाती है, जिसमें पुराने अक्षरों के आधार खुले होते हैं और स्वर चिह्न जुड़े होते हैं।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक संजीव कुमार सिंह ने कहा, “नागरी लिपि धीरे-धीरे देवनागरी में विकसित हुई। आज अक्षरों का निर्माण अलग तरीके से होता है, जबकि पुरानी लिपि में खुले आधार होते थे और स्वर चिह्न जुड़े होते थे। इस आधार पर मैं कह सकता हूं कि यह पांडुलिपि लगभग 150 से 200 वर्ष पुरानी हो सकती है।”
#dailyaawaz #newswebsite #news #newsupdate #hindinews #breakingnews #headlines #headline #newsblog #hindisamachar #latestnewsinhindi
Hindi news, हिंदी न्यूज़ , Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi, ताजा खबरें



