मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नदियों के पुनर्जीवन प्रयासों को गति प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में सशक्त कार्य बल (ईटीएफ) की 18वीं बैठक 30 मार्च 2026 को आयोजित की गई। इस बैठक में स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) के अंतर्गत हुई प्रगति की समीक्षा की गई और नमामि गंगा कार्यक्रम को और गति प्रदान करने के लिए प्रमुख नीतिगत, अवसंरचनात्मक और समन्वय संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के प्रमुख हितधारक एक साथ आए। इसमें जल संसाधन विभाग के सचिव वीएल कंथा राव, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक केके मीना, स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल, जल संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव गौरव मसालदान, एनएमसीजी के उप महानिदेशक नलिन श्रीवास्तव, परियोजना निदेशक बृजेंद्र स्वरूप, तकनीकी निदेशक अनुप कुमार श्रीवास्तव, वित्त निदेशक भास्कर दासगुप्ता, संयुक्त सचिव (डीडीडब्ल्यूएस) ऐश्वर्या सिंह, उत्तर प्रदेश के एसीएस अनुराग श्रीवास्तव, यूपीजेएन के प्रबंध निदेशक राज शेखर और अन्य प्रमुख हितधारक शामिल थे। उत्तराखंड के शहरी विकास सचिव नितेश झा, हरिद्वार की मेला अधिकारी सोनिका मीना, उत्तराखंड के परियोजना निदेशक रोहित मीना, पश्चिम बंगाल एसपीएमजी की परियोजना निदेशक नंदिनी घोष, झारखंड के परियोजना निदेशक सूरज और एनएमसीजी तथा सहभागी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में उपस्थित थे। भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय और गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान नमामि गंगा कार्यक्रम के अंतर्गत परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन की सराहना की। उन्हें बताया गया कि अब तक 524 परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। इनमें से 355 पूरी हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, चालू वित्त वर्ष में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 17 एसटीपी परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जो हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय और कार्यान्वयन में निरंतर गति को दर्शाती हैं।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभिन्न राज्यों में सीवरेज अवसंरचना के प्रमुख विकासों पर बैठक में प्रकाश डाला गया। इसमें डीपीआर (विस्तृत रिपोर्ट) को शीघ्रता से प्रस्तुत करने और अंतर-एजेंसी समन्वय में सुधार पर केंद्रित चर्चा हुई। मंत्री ने राज्यों को लंबित कार्यों में तेजी लाने और नदी जल की गुणवत्ता में ठोस सुधार लाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं के सुचारू कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। नीतिगत सुधारों, विशेष रूप से उपचारित अपशिष्ट जल के सुरक्षित पुन: उपयोग पर जोर दिया गया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने पिछली ईटीएफ बैठकों में इस क्षेत्र को काफी बढ़ावा दिया था। यह बताया गया कि निरंतर निगरानी के परिणामस्वरूप उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों ने राज्य मंत्रिमंडल से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद राष्ट्रीय ढांचे के अनुरूप अपनी नीतियों को अधिसूचित करके महत्वपूर्ण प्रगति की है, जबकि बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे अन्य राज्य अंतिम रूप देने के उन्नत चरणों में हैं।श्री पाटिल ने सतत जल प्रबंधन के लिए एक प्रमुख रणनीति के रूप में पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के महत्व पर बल दिया। बैठक में जलभंडार मानचित्रण, आर्द्रभूमि संरक्षण और हवाई जल निकासी मानचित्रण से संबंधित पहलों की समीक्षा की गई, जिसमें वैज्ञानिक योजना और एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन को मजबूत करने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया। उत्तर प्रदेश और बिहार में उच्च प्राथमिकता वाली आर्द्रभूमियों की पहचान और संरक्षण में हुई प्रगति पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम की महत्वपूर्ण प्रगति और सहयोगात्मक प्रयासों को प्रदर्शित करते हुए कई प्रमुख पहलों और गतिविधियों पर प्रकाश डाला गया। इनमें गंगा जलीय जीवन संरक्षण निगरानी केंद्र का उद्घाटन, विभिन्न राज्यों में छोटी नदियों के पुनरुद्धार की सफलता की कहानियों का प्रस्तुतीकरण, और हाल ही में ग्लेशियरों और गाद प्रबंधन पर आयोजित तकनीकी कार्यशालाएँ, साथ ही जन जागरूकता कार्यक्रम शामिल थे। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने विभिन्न राज्यों में कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के चालू होने की सराहना की, इसे गंगा और उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, और स्वच्छ और स्वस्थ नदी तटों में योगदान देने वाले चल रहे घाट सफाई अभियानों की भी प्रशंसा की। उत्तराखंड सरकार द्वारा आगामी कुंभ 2027 की तैयारियों पर एक प्रस्तुति भी दी गई, जिसमें स्वच्छ और टिकाऊ आयोजन सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी ढांचे की तैयारी, स्वच्छता व्यवस्था और नदी संरक्षण उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक के समापन पर मंत्री जी ने केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच निरंतर समन्वय के महत्व पर बल दिया। उन्होंने दोहराया कि गंगा का पुनरुद्धार एक सामूहिक जिम्मेदारी है जिसके लिए समयबद्ध कार्रवाई, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने स्वच्छ, प्रवाहित और सतत गंगा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया और सभी हितधारकों से निरंतर समर्पण और समन्वित प्रयासों का आह्वान किया।
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