केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में आईएसए पवेलियन का किया दौरा

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केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में आईएसए पवेलियन का किया दौरा

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भारत मंडपम के हॉल नंबर 14 में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के पवेलियन का दौरा किया और ग्लोबल मिशन ऑन एआई फॉर एनर्जी को आगे बढ़ाने वाली प्रौद्योगिकी -आधारित नवाचारों की एक श्रृंखला की समीक्षा की। पवेलियन में ऐसे व्यावहारिक और स्केलेबल मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं, जो दर्शाते हैं कि आर्टिफिशियन इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल प्लेटफॉर्म और भू-स्थानिक उपकरण किस प्रकार उपयोगिताओं को आधुनिक बना सकते हैं, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण को तेज़ कर सकते हैं, और आईएसए सदस्य देशों में ऊर्जा सुदृढ़ता ला सकते हैं। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट ने ग्लोबल मिशन ऑन एआई फॉर एनर्जी को एक ऐसे मंच के रूप में प्रस्‍तुत किया है, जो सौर ऊर्जा उपयोग और डिजिटल इंटेलिजेंस के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है, वास्तविक समय में अनुकूलन करता है और स्मार्ट ग्रिड प्रबंधन को सक्षम बनाता है। ऊर्जा परिवर्तन से ग्रिड परिवर्तन तक  जैसे-जैसे वितरित नवीकरणीय ऊर्जा तेजी से विस्‍तारित हो रही है, फोकस केवल नई क्षमता जोड़ने से हटकर लाखों विकेंद्रीकृत संसाधनों को स्थिर और विश्वसनीय ग्रिड में समेकित करने की दिशा में परवर्तित हो रहा है। इसके लिए मजबूत ट्रांसमिशन अवसंरचना, आधुनिक वितरण नेटवर्क और वास्तविक समय में निगरानी करने वाली प्रणालियों की आवश्यकता होती है।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस बात का उल्लेख किया कि ऊर्जा परिवर्तन के साथ-साथ ग्रिड परिवर्तन भी होना चाहिए, जिसमें डेटा-आधारित पूर्वानुमान और वास्तविक समय अनुकूलन से संचालित लचीले, डिजिटल और इंटेलिजेंट ग्रिड का निर्माण किया जाए। दिल्ली, राजस्थान और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य डिजिटलीकरण, स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल नियंत्रण प्रणालियों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे ऊर्जा हानि कम हो रही है और नवीकरणीय ऊर्जा का उच्च स्तर शामिल करना संभव हो रहा है। ये अनुभव उन विकासशील देशों के लिए मूल्यवान सबक प्रदान करते हैं जो अपने बिजली क्षेत्र को आधुनिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत की सौर यात्रा: बड़े पैमाने पर दृष्टि भारत की सौर क्षमता 2014 में 3 गीगावाट से भी कम थी, जो आज 141 गीगावाट से अधिक हो गई है, जिससे देश विश्व के सबसे तेजी से बढ़ते सौर बाजारों में शामिल हो गया है। सौर ऊर्जा अब भारत की विकास रणनीति और ऊर्जा सुरक्षा ढाँचे का प्रमुख हिस्सा बन गई है। इस यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सौर ऊर्जा को सर्वसुलभ बनाना रही है। पीएम-कुसुम के माध्यम से किसान ऊर्जा उत्पादक बन रहे हैं, लाखों सौर पंप डीज़ल पर निर्भरता कम कर रहे हैं और दिन के समय विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। फीडर स्तर पर सौर ऊर्जा अपनाने से बिजली की आपूर्ति की गुणवत्ता सुधर रही है और वितरण हानि कम हो रही है। इसी तरह, एक करोड़ घरों को लक्षित करने वाली पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना दुनिया का सबसे बड़ा रूफटॉप सौर कार्यक्रम बनने की राह पर है। यह योजना उपभोक्ताओं को उत्पादक-उपभोक्ता में बदल रही है और देशव्यापी वितरित ऊर्जा प्रणालियों को मजबूत कर रही है। 125 सदस्यों और हस्ताक्षरकर्ता देशों के साथ, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) व्यावहारिक और अनुकरणीय समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है। ग्लोबल मिशन ऑन एआई फॉर एनर्जी के माध्यम से, आईएसए सौर ऊर्जा और डिजिटल इंटेलिजेंस के संयोजन को बढ़ावा दे रहा है। आर्टिफिशियन इंटेलिजेंस लोड पूर्वानुमान, भविष्यसूचक रखरखाव, ग्रिड अनुकूलन और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण को महत्वपूर्ण रूप से बेहतर बना सकती है, जिससे दक्षता, किफायतीपन और मजबूती बढ़ती है। श्री जोशी ने ज़ोर देकर कहा कि भारत की सौर सफलता केवल स्थापित मेगावाट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को सशक्त बनाने, किसानों की सहायता करने, उपयोगिताओं को मजबूत करने और अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने में भी है।

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