शिव जी की जटाओं से प्रकट हैं गंगा मैया! प्रत्येक जल बिन्दु में मोक्ष प्रदान करने का सामर्थ्य है।
माघ मेला में आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी ने उत्साह, आनंद और उल्लास की वर्षा करा दी। वेद विद्या मार्तण्ड ब्रह्मचारी डॉ गिरीश जी के संयोजन में यह कथा चल रही है। शिव पुराण की महिमा में प्रयागराज का उल्लेख है शिव तीर्थ के रूप में यह पहले से ख्यात है। शिव पुराण में 24000 श्लोक हैं इसको सुनने वाला साक्षात शिव धाम जाता है। हर हर शंकर! घर-घर शंकर! का जय घोषकर आचार्य जी ने रुद्राक्ष की महिमा तथा पापी देवराज की मुक्ति की अद्भुत कथा सुनाई। बिंदुग तथा चंचुला की रहस्यमई कथा से लोग भाव विभोर हो गए।
राजा पृथु, अज और रघु के समय भी यहां माघ मेला और कुंभ लगता था। पहले से ही यहां दान की परंपरा रही है। यहां पर सदा यज्ञ होते ही रहे हैं इसीलिए इस स्थान का नाम प्रयागराज है। ज्ञान यज्ञ, तप यज्ञ, दान यज्ञ और स्नान यज्ञ सब कुछ एक साथ इस पवित्र भूमि में ही संभव है।
स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती आश्रम परिसर में पूज्य महर्षि महेश योगी जी के समाधि स्थल के निकट शिव पुराण की कथा हो रही है। इसमें आश्रम के 600 वैदिक विद्वान एवं अतिथि अभ्यागत सहित हजारों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। विद्वान् आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी जी ने कथा की श्रवण विधि बताकर शिव जी के स्वरूप का वर्णन किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में आचार्य बसंत जी एवं श्री सुनील जी ने माल्यार्पण कर आचार्य जी का स्वागत किया।
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