सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को 58वें ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा हो गई है। यह भारत का सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार है। यह पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। इससे सम्मानित होने वाले व्यक्ति को 11 लाख रुपये की धनराशि दी जाती है। इसके अलावा प्रशस्ति पत्र के साथ ही वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा भी दी जाती है।
58वें ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा करते हुए ज्ञानपीठ चयन समिति ने बताया कि इस साल मशहूर गीतकार और कवि गुलजार और संस्कृत विद्वान जगद्गुरु रामभद्राचार्य को इसके लिए चुना किया गया है। जानकारी के अनुसार, उर्दू के लिए मशहूर गीतकार गुलजार और संस्कृत के लिए जगतगुरु रामभद्राचार्य को 58वां ज्ञानपीठ सम्मान दिया जाएगा। भारतीय ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आरएन तिवारी ने आईएएनएस को बताया कि प्रसिद्ध कथाकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रतिभा राय की अध्यक्षता में चयन समिति ने फैसला लिया।
बता दें कि, गुलजार को हिंदी सिनेमा के महानतम गीतकार और लेखकों में से एक माना जाता है। इससे पहले उन्हें 2002 में उर्दू के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार, 2004 में पद्म भूषण, 2008 में अकेडमी अवॉर्ड, 2010 में ग्रैमी अवॉर्ड और 2013 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। इसके अलावा उनके नाम 5 नेशनल अवॉर्ड समेत कई और अवॉर्ड्स भी हैं।
रामभद्राचार्य का जन्म 1950 में जौनपुर के खांदीखुर्द गांव में हुआ था।चित्रकूट में रहनेवाले रामभद्राचार्य प्रख्यात विद्वान, शिक्षाविद्, बहुभाषाविद्, रचनाकार, प्रवचनकार, दार्शनिक और हिन्दू धर्मगुरु हैं। रामानन्द सम्प्रदाय के वर्तमान चार जगद्गुरु रामानन्दाचार्यों में से एक हैं और इस पद पर 1988 से प्रतिष्ठित हैं। रामभद्राचार्य चित्रकूट में स्थित संत तुलसीदास के नाम पर स्थापित तुलसी पीठ नामक धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष हैं।
बहुभाषाविद् रामभद्राचार्य संस्कृत, हिन्दी, अवधी, मैथिली सहित कई भाषाओं में आशुकवि और रचनाकार हैं। रामभद्राचार्य 22 भाषाएं भी बोलते हैं। आरएन तिवारी ने बताया कि उन्होंने 240 से अधिक पुस्तकों और ग्रंथों की रचना की है, जिनमें चार महाकाव्य (दो संस्कृत और दो हिन्दी में), रामचरितमानस पर हिन्दी टीका, अष्टाध्यायी पर काव्यात्मक संस्कृत टीका और प्रस्थानत्रयी (ब्रह्मसूत्र, भगवद्गीता और प्रधान उपनिषदों) पर संस्कृत भाष्य सम्मिलित हैं। उन्हें तुलसीदास पर भारत के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों में गिना जाता है। रामचरितमानस की एक प्रामाणिक प्रति के रामभद्राचार्य सम्पादक हैं, जिसका प्रकाशन तुलसी पीठ ने किया है। 2015 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया है।
#dailyaawaz #newswebsite #news #newsupdate #hindinews #breakingnews #headlines #headline #newsblog #hindisamachar #latestnewsinhindi
Hindi news, हिंदी न्यूज़ , Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi, ताजा ख़बरें



