मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब में कई जिले भीषण बाढ़ की चपेट में हैं, क्योंकि सतलुज, ब्यास और रावी नदियों तथा मौसमी नालों में भारी बारिश के कारण जलस्तर बहुत बढ़ गया है। रावी नदी में अभूतपूर्व 14.11 लाख क्यूसेक पानी दर्ज किया गया, जो 1988 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान रिकॉर्ड हुए 11.20 लाख क्यूसेक से भी अधिक है। पहाड़ी क्षेत्रों से आई भारी जलराशि ने प्रदेश के कई निचले इलाकों को डुबो दिया है। मंझा और दोआबा क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में जलस्तर में कमी आने लगी है, लेकिन मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में और बारिश की संभावना जताई है, जिससे पटियाला और अमृतसर जैसे पहले से प्रभावित जिलों में चिंताएँ बढ़ गई हैं। राहत और बचाव कार्य जोरों पर हैं, जिसमें सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पंजाब पुलिस और कई स्वयंसेवी संगठन लगातार लगे हुए हैं।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और स्थिति की निगरानी के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है। उन्होंने मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा को राहत कार्य तेज़ करने के निर्देश दिए हैं। इसी दौरान, सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट पर रखा है और प्रभावित इलाकों में वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और महिलाओं की विशेष देखभाल के निर्देश दिए हैं।
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