मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना ने सरकारी एजेंसियों, समुदायों, मीडिया, सिविल सोसाइटी एवं आम जनता सहित विभिन्न हितधारकों को संगठित कर नीतिगत पहल से राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले लिया है। लोकसभा में लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर जन्म लिंगानुपात 2014-15 के 918 से बढ़कर 2024-25 में 929 हो गया है तथा माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 80.2 प्रतिशत हो गया है।
आप को बता दे, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के 2020-21 HMIS डेटा के आधार पर जन्म लिंगानुपात की स्थिति के अनुसार जिलों को धनराशि प्रदान की जा रही है। यह योजना 22 जनवरी 2015 को बाल लिंगानुपात सुधारने एवं बालिकाओं-महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु जीवनचक्र निरंतरता पर शुरू की गई थी। योजना लिंगानुपात एवं लिंग आधारित भेदभाव के तात्कालिक मुद्दों के साथ-साथ बालिका को मूल्यांकन एवं उसके अधिकारों-अवसरों की संस्कृति परिवर्तनकारी पहल करती है।
Image source: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
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