मध्य प्रदेश सरकार और डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर किए गए हस्ताक्षर

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मध्य प्रदेश सरकार और डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर किए गए हस्ताक्षर
(Representative Image)

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (डीआईबीडी) को भोपाल में आयोजित मध्य प्रदेश क्षेत्रीय एआई एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 में आमंत्रित किया गया। मध्य प्रदेश सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इंडियाएआई मिशन के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गज, स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों और केंद्रीय एजेंसियों को एक मंच पर साथ लाया गया, ताकि शासन में समावेशी और जवाबदेह एआई अपनाने पर विचार-विमर्श किया जा सके। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने नागरिक-केंद्रित शासन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के राज्य के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला और घोषणा की कि मध्य प्रदेश जल्द ही मिशन मोड में राज्य स्तरीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति लागू करेगा। उन्होंने भाषाई और क्षेत्रीय सीमाओं के पार एआई-आधारित शासन का विस्तार करने में भाषिनी जैसे बहुभाषी मंचों की भूमिका पर जोर दिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मध्य प्रदेश सरकार और डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ज्ञापन राज्य सरकार के डिजिटल मंचों में भाषिनी की भाषा प्रौद्योगिकियों, अनुवाद एपीआई और एआई-संचालित भाषा उपकरणों के एकीकरण के माध्यम से बहुभाषी डिजिटल शासन को सक्षम बनाने के लिए सहयोग को औपचारिक रूप देता है, जिससे कई भारतीय भाषाओं में सार्वजनिक सेवाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित होती है।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस साझेदारी के माध्यम से भाषिनी मध्य प्रदेश के डिजिटल शासन व्यवस्था में आवाज-प्रधान और बहुभाषी एआई समाधानों के फैलाव में सहयोग करेगा, जिससे पहुंच, समावेशिता और दूर दराज के क्षेत्रों में सेवा वितरण को मजबूत किया जा सकेगा। यह सहयोग भाषिनी के राष्ट्रीय भावना के अनुरूप है। इसका उद्देश्य भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में भारतीय भाषाओं को समाहित करना है। यह सुनिश्चित करना है कि भाषाई विविधता भारत की डिजिटल परिवर्तन यात्रा में एक ताकत बने। एमईआईटीवाई के अतिरिक्त सचिव और इंडियाएआई के सीईओ अभिषेक सिंह ने एआई प्रणालियों को मजबूत करने में भाषा डेटासेट के महत्व पर जोर दिया और कहा कि भाषिनी डिजिटल सरकारी सेवाओं के प्रभावी और समावेशी वितरण का समर्थन करते हुए भारतीय भाषाओं में निर्बाध बहुभाषी अनुवाद को सक्षम बनाता है। मध्य प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और शहरी विकास एवं आवास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने इस बात पर जोर दिया कि भाषिनी के साथ एकीकरण से राज्य प्रशासन के तहत काम करने वाले मंच कई भारतीय भाषाओं में निर्बाध रूप से काम कर सकेंगे, जिससे विविध भाषाई पृष्ठभूमि के नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित होगी। भाषिनी की भूमिका पर और अधिक प्रकाश डालने के लिए डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने ‘सभी के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित शासन’ विषय पर आयोजित सत्र में भाग लिया। चर्चा के दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई को अपनाना सुधार की एक निरंतर यात्रा है, जो वास्तविक दुनिया के उपयोग, प्रतिक्रिया और मॉडल के निरंतर सुधार से प्रेरित होती है। उन्होंने खुले और सहयोगात्मक पारिस्थितिकी तंत्र में काम करने के महत्व पर प्रकाश डाला, जहां एआई सिस्टम सरकारी हितधारकों, उद्योग और व्यापक समूह के साथ साझेदारी के माध्यम से विकसित होते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि डेटा एआई की नींव है और प्रभावी, स्केलेबल एवं समावेशी भाषा एआई सिस्टम बनाने के लिए निरंतर डेटासेट निर्माण आवश्यक है। भाषिनी के संबंध में हुई चर्चा ने भारत के एआई-आधारित शासन दृष्टिकोण के एक प्रमुख प्रवर्तक के रूप में इसकी भूमिका को पुनः स्थापित कर यह सुनिश्चित किया कि भाषाई विविधता डिजिटल समावेश को मजबूत करे और तकनीक आधारित सार्वजनिक सेवा वितरण को गति दे।

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