मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समत्व भवन में पंडित मुस्तफा आरिफ उज्जैन की पुस्तक ‘गीता भारती’ का विमोचन किया। इस पुस्तक में भगवद गीता के श्लोक ‘हिन्दी मुक्तक’ के रूप में लिखकर संकलित किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लेखक को इस काव्य सृजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पंडित मुस्तफा आरिफ ने इस पुस्तक की रचना के बारे में बताया कि जहां धर्म है, वहां कर्म सर्वोपरि है। इसी कारण सभी धर्म- प्रधान हैं। कुरान शरीफ की 6666 आयतों पर 10 हजार हिंदी पद रचने के बाद परमात्मा-प्रदत्त सदबुद्धि ने उन्हें कर्म- आधारित धर्म ग्रंथों की ओर मोड़ा है। श्रीमद भगवद्गीता के कर्म-दर्शन ने उन्हें गहराई से प्रेरित किया। उनकी लेखनी परमात्मा की कृपा से गीतामय होकर शोध-यात्रा पर निकली, जिसकी परिणति श्रीमद भगवद्गीता के 700 संस्कृत श्लोकों पर 786 हिंदी मुक्तकों में हुई। पं. आरिफ ने बताया कि यह ग्रंथ सनातन हिंदू दर्शन को आत्मसात करने का अभिनव अनुभव रहा है, जो भारत की संस्कृति और अनेकता में एकता की परम्परा को जन-जन तक पहुंचाने की प्रेरणा देता है।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुस्तक में गीता के गहन संदेश- कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग और मोक्ष को 786 भावपूर्ण हिंदी मुक्तकों में बांधा गया है। यह हिंदी मुक्तक जीवन की जटिलताओं में स्पष्ट करते हैं। मुक्तकों के प्रत्येक छंद सरल भाषा में रचे गए हैं, जिससे साधारण व्यक्ति गीता का सार समझ सके। पं. आरिफ का विश्वास है कि हिंदू और इस्लामी ग्रंथों में कई समानताएं हैं, जैसे दोनों ईश्वरीय प्रेरणा पर जोर देते हैं। इन ग्रंथों का अध्ययन शोध की भी अनंत संभावनाएं खोलने में सहायक है। भारत के विश्व गुरू होने के जो आधार हैं, वे भी अध्ययन के फलस्वरूप स्पष्ट होते हैं।
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