मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि देश को अगले कुछ वर्षों में स्वदेशी ड्रोन निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन को संबोधित करते हुए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्तमान भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने, रक्षा तैयारियों को बढ़ाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ड्रोन उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने बताया कि कई एमएसएमई कृत्रिम मेधा, स्वचालन, रोबोटिक्स और अन्य उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक सुदृढ़ और समावेशी रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह पारिस्थितिकी तंत्र एमएसएमई, स्टार्टअप, युवा नव-प्रवर्तकों और भारत की रक्षा क्षमताओं के भविष्य को आकार देने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज के 14वें संस्करण और रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार-आई-डेक्स फ्रेमवर्क के तहत नवीन प्रौद्योगिकियों के विकास को उत्कृष्ट बनाने की योजना-ऐसिंग डेवलपमेंट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए इस वर्ष के केंद्रीय बजट में इक्विटी, लिक्विडिटी और व्यावसायिक समर्थन के त्रिस्तरीय दृष्टिकोण को अपनाया है।
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