राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले नेपाल के पीएम और मालदीव के राष्ट्रपति

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले नेपाल के पीएम और मालदीव के राष्ट्रपति
(राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, नेपाल के पीएम और मालदीव के राष्ट्रपति) Image Source : Amar Ujala

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को अपने समकक्ष मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। नेपाली पीएम प्रचंड से मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि नेपाल भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत एक प्राथमिकता वाला साझेदार देश है। उन्होंने दोनों देशों के बीच ”अद्वितीय संबंधों को और मजबूत करने” के लिए देश की प्रतिबद्धता व्यक्त की। राष्ट्रपति भवन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने नेपाल में कई क्षेत्रों में विकास से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। जिससे दोनों देशों के लोगों को लाभ मिल रहा है।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वहीं राष्ट्रपति मुइज्जू का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई सरकार और मालदीव के लोगों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने विश्वास भी जताया कि द्वीप राष्ट्र मुइज्जू के नेतृत्व में समृद्धि और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक और बहुआयामी संबंधों पर ध्यान दिया गया। इसके अलावा व्यापक द्विपक्षीय सहयोग पर जोर दिया गया।

मीडिया में आई खबर के अनुसार, इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भारत-मालदीव के संबंध मजबूत होते रहेंगे। बता दें कि नेपाल के पीएम पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भारत के पड़ोसी और हिंद महासागर क्षेत्र के उन सात नेताओं में शामिल थे, जो रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। पिछले साल 17 नवंबर को मालदीव के राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू की ये पहली भारत यात्रा थी।

मीडिया सूत्रों के अनुसार, चीन की तरफ झुकाव के लिए जाने जाने वाले मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के पद संभालने के बाद से भारत और मालदीव के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे। मालदीव के राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने अपने देश से भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस बुलाने की मांग की थी। जबकि इस महीने की शुरुआत में भारतीय सैन्य कर्मियों की जगह नागरिकों को नियुक्त किया गया था।

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