मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने बुधवार को रूस के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई करते हुए 398 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए। भारत, रूस, चीन, हांगकांग, यूएई, तुर्किये, थाईलैंड, मलेशिया, स्विटजरलैंड समेत दर्जन भर से ज्यादा देशों की इन कंपनियों पर रूस को लड़ाई में सक्षम बनाने और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने से जुड़े उत्पाद और सेवाएं प्रदान करने का आरोप है। अमेरिकी वित्त और गृह मंत्रालय के इन प्रयासों का उद्देश्य उन सभी देशों को दंडित करना है, जो क्रेमलिन को सामग्री के रूप में सहायता पहुंचा रहे हैं या फिर फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस के ऊपर लगाए गए हजारों प्रतिबंधों से बचने में मदद कर रहे हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा प्रतिबंधित 274 कंपनियों पर रूस को अत्याधुनिक तकनीक आपूर्ति करने का आरोप है। साथ ही रूस की रक्षा एवं निर्माण से जुड़ी कंपनियां भी हैं जो उन सैन्य उत्पादों का उत्पादन या पूर्ण करती हैं, जिसे यूक्रेन के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इसके अलावा गृह मंत्रालय ने रूसी रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा कंपनियों, चीनी कंपनियों और बेलारूस के व्यक्तियों पर राजनयिक प्रतिबंध भी लगाए है। बुधवार की कार्रवाई उन हजारों अमेरिकी प्रतिबंधों में नवीनतम है जो यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से अन्य देशों में रूसी कंपनियों और उनके आपूर्तिकर्ताओं पर लगाए गए हैं। इन प्रतिबंधों के असर पर सवाल उठे हैं, खासकर जब रूस ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल और गैस बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को संभालना जारी रखा है। भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंधरायटर के अनुसार भारत की फ्यूचरेवो उन कंपनियों में से एक है जिन्हें निशाना बनाया गया है। इस कंपनी पर आरोप है कि यह रूस के ओरलान ड्रोन को उच्च प्राथमिकता वाली वस्तुओं की आपूर्ति कर रही थी। वहीं, श्रेया लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, जिस पर आरोप है कि इसने 2023 से रूस को अमेरिकी ट्रेडमार्क वाली सैकड़ों प्रौद्योगिकियां भेजी हैं, जिनकी कीमत करोड़ों डालर में है।
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