खनन क्षेत्र में मध्यप्रदेश बना अग्रणी : सीएम डॉ. मोहन यादव

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मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक प्रारंभ होने के पहले मंत्रीगण को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं, गत पखवाड़े की प्रमुख उपलब्धियों और कार्यक्रमों की जानकारी दी। साथ ही सरकार के आने वाले तीन वर्ष के प्रमुख लक्ष्यों से भी अवगत करवाया। वर्ष-2026 की मंत्रिपरिषद की प्रथम बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मुख्य सचिव अनुराग जैन ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों को कैलेंडर वर्ष 2026 प्रारंभ होने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन अनुसार जनकल्याण के कार्य किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बनेगा और नागरिकों के हित में योजनाओं और परियोजनाओं के व्यवस्थित क्रियान्वयन में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार के 2 वर्ष के सफल कार्यकाल के लिए बधाई भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद के सदस्यों को बताया कि वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर देश में अग्रणी रहा है। यह उपलब्धि प्रदेश की पारदर्शी नीतियों, त्वरित निर्णय प्रक्रिया और निवेश-अनुकूल वातावरण का प्रमाण है। खनिज नीलामी वर्ष 2025 में देशभर में नीलाम किए गए 141 खनिज ब्लॉकों में से 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी मध्यप्रदेश में हुई, जो देश में सर्वाधिक है। खान एवं खनिज विकास (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2025 और इससे जुड़े नियमों में किए गए बदलावों से खनिज अन्वेषण, नीलामी, निवेश और स्थानीय विकास को अभूतपूर्व गति मली है। चूना, पत्थर, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे प्रमुख खनिजों की नीलामी से सीमेंट, स्टील और संबद्ध उद्योगों को मजबूती मिली है।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गत 25 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न से सम्मानित स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट का शुभारंभ किया।इसमें 2 लाख करोड़ रूपए से अधिक लागत से विभिन्न औद्योगिक और निर्माण इकाइयों के भूमि-पूजन हुआ है। केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने 5,810 करोड़ रूपए की परियोजनाओं का लोकार्पण किया। यही नहीं, 860 वृहद औद्योगिक इकाईयों के लिए 725 करोड़ की निवेश प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। इसी अवसर पर विशेष प्रदर्शनी में ‘निवेश से रोजगार-अटल संकल्प’ विषय पर चित्रों का संयोजन किया गया। मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति और आर्थिक विकास की झलक प्रदर्शनी में देखने को मिली। पोखरण परमाणु परीक्षण जैसी ऐतिहासिक उपलब्धि को भी प्रदर्शित किया गया। प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी के संबोधनों और उनकी जीवन यात्रा और विचारधारा को भी प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष-2026 – कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। वर्ष 2025 उद्योग और रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया। प्रदेश में किसान कल्याण, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता, पशुपालन, डेयरी विकास, पंचायत और ग्रामीण विकास, राजस्व, ऊर्जा, नवकरणीय ऊर्जा से जुड़े आयामों पर विशेष कैलेंडर आगामी 11 जनवरी को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जारी किया जाएगा। इसी दिन 1100 ट्रैक्टरों की रैली भी निकलेगी। जनवरी से दिसंबर तक सभी विभागों की गतिविधियों का निर्धारण कर जिला एवं संभाग स्तर पर कार्यक्रम होंगे। आगामी तीन वर्ष का लक्ष्य निर्धारित कर गतिविधियां संचालित की जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर में गत 2 जनवरी को जहां गीता भवन का लोकार्पण हुआ, वहीं अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में देश-दुनिया से आए करीब 125 विद्वानों के व्याख्यान भी हुए। पद्मभूषण स्वामी रामभद्राचार्य सहित अनेक संत और विद्वतजन सम्मेलन में शामिल हुए। सुंदरकांड से सम्मानित पाठ में व्यापक भागीदारी रही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने गत 23 दिसम्बर को पीपीपी मॉडल पर प्रदेश के धार और बैतूल में बनने वाले मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास किया। देश में ये मेडिकल कॉलेज इस मॉडल पर निर्मित होने वाले प्रथम मेडिकल कॉलेज होंगे। नवाचार का सिलसिला निरंतर चलेगा। आगामी 23 जनवरी को कटनी और पन्ना में मेडिकल कॉलेज के शिलान्यास की तैयारी की जा रही है। प्रदेश में चिकित्सा जगत में यह नई उपलब्धि है। गत 2 वर्ष में 6 शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारंभ हुए। इसके पहले वर्ष 2002-03 तक प्रदेश में मात्र 5 मेडिकल कॉलेज थे। वर्तमान में इनकी संख्या 33 हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि विशाखापटनम में हाल ही में राष्ट्रीय पेसा दिवस पर पेसा सम्मेलन का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश के चयनित 9 जिलों की 20 महिला सरपंच प्रतिनिधियों ने पेसा महोत्सव में हिस्सा लिया। प्रदेश के 20 जनजातीय बहुल क्षेत्रों से चयनित 9 जिलों अलीराजपुर, झाबुआ, धार, बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया एवं डिंडोरी से कुल 152 सदस्य पेसा महोत्सव में शामिल हुए। इस सम्मेलन में प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में उपयोग में लिए जाने वाले पारम्परिक व्यंजनों का प्रचार-प्रसार भी हुआ। खासतौर पर मोटे अनाज ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, रागी के ताजा शुद्ध और स्वादिष्ट पकवान सम्मेलन में पसंद किए गए। विभिन्न प्रांतों से आए प्रतिभागियों ने मध्यप्रदेश के तिल, गुड और महुए के लड्डू भी प्रसंद किए।

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