केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्मिक मंत्रालय में कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों सहित, अधिकारियों के साथ बैठक में नव वर्ष कार्य समीक्षा की

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्मिक मंत्रालय में कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों सहित, अधिकारियों के साथ बैठक में नव वर्ष कार्य समीक्षा की

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कार्मिक मंत्रालय की नव वर्ष कार्य समीक्षा की, जिसमें कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों सहित अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में उन्होंने सभी अधिकारियों से खुलकर स्पष्ट रूप से अपने विचार व्यक्त करने को कहा। उन्होंने कहा कि वे उनकी हर बात ध्यान से सुनने को तैयार हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि किसी भी प्रशासनिक संस्था के सुचारू संचालन के लिए पदक्रम या प्रोटोकॉल की बाधाओं से मुक्त स्वतंत्र परस्पर संवाद आवश्यक है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पर जोर दिया कि आज अपनाई जा रही कई आधिकारिक प्रक्रियाएं स्वतंत्रता-पूर्व परंपराएं हैं जिनकी गहन समीक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यालय अधिकारी को मौजूदा प्रक्रियाओं और परंपराओं का विचारशील अध्ययन कर पता लगाना चाहिए कि लोकतांत्रिक, प्रौद्योगिकी-संचालित देश में ये प्रथाएं अब प्रासंगिक हैं या नहीं । उन्होंने कहा कि भारतीय मूल्यों और समकालीन शासन आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशासनिक प्रक्रियाओं का भारतीयकरण जरूरी है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन- एपीआर/एपीएआर जैसी प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणालियों को सरल, अधिक उद्देश्यपूर्ण और परिणामोन्मुखी बनाना आवश्यक है। डॉ सिंह ने कहा कि मूल्यांकन में सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता अनिवार्य है, क्योंकि यह प्रणाली कार्य मूल्यांकन और करियर विकास दोनों को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि इसके सरलीकरण और स्वचालन से व्यक्तिपरकता कम होगी, न्यूनतम पूर्वाग्रह होगा और कर्मचारियों तथा संगठनों दोनों को लाभ होगा।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैठक में डॉ सिंह ने सिविल सेवाओं में करियर की प्रगति और विशेषज्ञता के मुद्दे पर भी चर्चा की। अवर सचिव स्तर पर लंबे समय तक पद पर ठहराव संबंधी चिंताओं पर हुए उन्होंने अधिकारियों को उनके अनुभव और विशेषज्ञता के अनुरूप क्षेत्रों में तैनात करने के महत्व पर बल दिया, ताकि संस्थागत जानकारी संरक्षित रहे और उसका प्रभावी इस्तेमाल हो सके। साथ ही, उन्होंने सभी सेवाओं में व्यापक अनुभव और क्षमता निर्माण के अवसर सुनिश्चित करने के लिए संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। चर्चा में क्षमता निर्माण पहल के तहत हो रहे सुधारों पर भी विचार किया गया, जिनमें भूमिका-आधारित प्रशिक्षण और नौकरी की भूमिकाओं का पुनर्गठन शामिल है ताकि उन्हें अधिक सार्थक और प्रभावी बनाया जा सके। डॉ. सिंह ने कहा कि चिंतन शिविर जैसे मंच इन सुधारों के लिए उपयोगी सुझाव प्रदान करते हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि इन विमर्शों से उत्पन्न व्यावहारिक विचारों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए। डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की पुरानी, ​​सामंती प्रथाओं को दूर कर अधिक कुशल, नागरिक-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासनिक ढांचे की ओर बढ़ने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि स्वचालन, सरलीकृत प्रक्रियाएं और कम कागजी कार्रवाई से अधिकारियों को प्रक्रियाओं के बजाय परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी, जो “अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार” के दृष्टिकोण के अनुरूप है। डॉ. सिंह ने कहा कि भविष्य में ऐसी समीक्षा बैठकें अधिक समावेशी बनाई जाएंगी। इससे अत्याधुनिक प्रशासन में अधिकारियों के साथ बातचीत से जमीनी स्तर की चुनौतियों और परिचालन संबंधी वास्तविकताओं की जानकारी मिलेगी जो मंत्रालय को ऐसे सुधारों की योजना बनाने में सहायक होगा जो व्यावहारिक, संतुलित और सभी हितधारकों के अनुरूप हों। बैठक में संयुक्त सचिव, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग एस.डी. शर्मा, अपर सचिव, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग पुनीत यादव, अपर सचिव, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग मनोज कुमार द्विवेदी, और संयुक्त सचिव, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग सरिता चौहान, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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