मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यूरोपीय आयोग ने एलोन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) के खिलाफ एक औपचारिक जांच शुरू की है। यह जांच इस चिंता के कारण शुरू की गई है कि प्लेटफॉर्म के एआई टूल ‘ग्रोक’ (Grok) का उपयोग वास्तविक लोगों के यौनित और आपत्तिजनक डीपफेक चित्र बनाने के लिए किया जा रहा है। यूरोपीय संघ के डिजिटल सेवा अधिनियम (DSA) के तहत यदि कंपनी नियमों के उल्लंघन की दोषी पाई जाती है, तो उस पर उसके वैश्विक वार्षिक कारोबार का 6% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यूरोपीय संसद की सदस्य रेजिना डोहर्टी ने स्पष्ट किया कि आयोग इस बात का आकलन करेगा कि क्या ‘X’ ने यूरोपीय नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने के अपने कानूनी दायित्वों को पूरा किया है या उन्हें नजरअंदाज किया है।
आप को बता दे, इस मामले में ‘X’ की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं क्योंकि ब्रिटेन के नियामक ऑफकॉम (Ofcom) ने भी इसी तरह की जांच की घोषणा की है। यूरोपीय आयोग के अधिकारियों ने इन डीपफेक चित्रों को ‘गिरावट का एक हिंसक और अस्वीकार्य रूप’ करार दिया है। हालांकि, एलोन मस्क ने इन प्रतिबंधों और जांच की आलोचना करते हुए इसे ‘सेंसरशिप का बहाना’ बताया है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म पर ब्लू टिक बैज के जरिए यूजर्स को गुमराह करने के आरोप में यूरोपीय संघ पहले ही कंपनी पर 120 मिलियन यूरो का जुर्माना लगा चुका है। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में भी इस चैटबॉट को लेकर जांच चल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी कंपनी कानून से ऊपर नहीं है और सुरक्षा मानकों में कोताही बरतने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Image source: Getty Images
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