मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हंगरी की नेशनल एसेम्ली के उपाध्यक्ष डॉ. लाजोस ओलाह के नेतृत्व में हंगरी के एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को संसद में राज्यसभा के उपाध्यक्ष हरिवंश से मुलाकात की। बैठक के दौरान हरिवंश ने इस बात पर जोर दिया कि संसदीय संवाद द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के संबंध दोनों देशों के सांसदों के बीच संवाद, आम सहमति-निर्माण और आपसी समझ को बढ़ावा देकर सरकारी कूटनीति को और मजबूत करते हैं। उन्होंने मार्च 2024 में हंगरी की अपनी यात्रा को याद किया और दोनों देशों के बीच अधिक संसदीय आदान-प्रदान जारी रखने की इच्छा व्यक्त की। संबंधों की मजबूत ऐतिहासिक नींव का उल्लेख करते हुए श्री हरिवंश ने कहा कि भारत और हंगरी के बीच राजनयिक संबंध 1948 में स्थापित हुए थे और 2023 में इनकी 75वीं वर्षगांठ मनाई गई। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देश लोकतांत्रिक शासन, संवैधानिक व्यवस्था, कानून के शासन और प्रतिनिधि संस्थाओं के प्रति प्रतिबद्धता को साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंध दोनों देशों के दूरदर्शी नेतृत्व द्वारा निर्देशित हैं।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत के डिजिटल परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘लोकहित हेतु प्रौद्योगिकी’ के सिद्धांत पर कार्य कर रहा है। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ का उल्लेख किया, जिसका शीर्षक “एआई का लोकतंत्रीकरण, एआई विभाजन को पाटना” है और जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को सभी के लिए सुलभ एवं लाभकारी बनाना है। उन्होंने इस शिखर सम्मेलन में हंगरी की भागीदारी की सराहना की। श्री हरिवंश ने यह भी उल्लेख किया कि भारत ने पेपरलेस व्यवस्था को सक्षम बनाने और सेवा वितरण को बेहतर करने के लिए डिजिटल पहचान (आधार), भुगतान प्रणाली (यूपीआई) और डिजिलॉकर सहित कई प्रमुख डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश पारस्परिक लाभ के लिए विशेषज्ञता और अनुभवों को साझा कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और संसदीय मामलों सहित प्रमुख क्षेत्रों में एआई का उपयोग करने के हंगरी के प्रयासों की जानकारी प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की। द्विपक्षीय सहयोग के संदर्भ में हरिवंश ने ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत यूक्रेन से भारतीय नागरिकों को निकालने में सहयोग हेतु हंगरी सरकार की सराहना की। शिक्षा को सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए हरिवंश ने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के अंतर्गत बैंकिंग, लेखापरीक्षा और संसदीय प्रक्रियाओं जैसे क्षेत्रों में पेशेवरों के लिए आयोजित विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में हंगरी की सक्रिय भागीदारी की प्रशंसा की। यह कार्यक्रम वर्ष 1964 से भारत की विकास साझेदारी की एक प्रमुख पहल है। इस अवसर पर राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी और सचिवालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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