केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम के डिब्रूगढ़ में ब्रह्मपुत्र (एनडब्ल्यू 2) पर अंतर्देशीय जलमार्ग को बढ़ावा देने के लिए 3 परियोजनाओं का किया उद्घाटन

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केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम के डिब्रूगढ़ में ब्रह्मपुत्र (एनडब्ल्यू 2) पर अंतर्देशीय जलमार्ग को बढ़ावा देने के लिए 3 परियोजनाओं का किया उद्घाटन

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम के डिब्रूगढ़ में राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (ब्रह्मपुत्र नदी) पर तीन प्रमुख अंतर्देशीय जलमार्ग अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में “विकास एवं विरासत” के संतुलित दृष्टिकोण पर बल दिया। इन परियोजनाओं में बोगीबील स्थित सीमा शुल्क एवं आव्रजन परिसर, धुबरी स्थित सीमा शुल्क एवं आव्रजन परिसर और डिब्रूगढ़ में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की हेरिटेज भवन शामिल हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन चौकडिंगी मैदान में किया गया जिसमें असम के विद्युत मंत्री प्रशांत फुकन, लोक निर्माण मंत्री जोगेन मोहन, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री बिमल बोराह सांसद रामेश्वर तेली, विधायक तेराश गोवाला, चक्रधर गोगोई, बिनोद हजारिका, पोनाकन बरुआ, तरंगा गोगोई, संजय किशन और भास्कर शर्मा उपस्थित हुए। इनके अलावा लोक निर्माण मंत्रालय के सचिव, विजय कुमार और आईडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष सुनील पालीवाल सहित मंत्रालय और आईडब्ल्यूएआई के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित हुए। केंद्रीय मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील शासन मॉडल को दर्शाती हैं, जो सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए तीव्र विकास सुनिश्चित करता है।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में हम विकास एवं विरासत की स्पष्ट दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहे हैं। हम अपनी जड़ें, अपनी विरासत एवं अपनी संस्कृति को संरक्षित रखते हुए प्रगति एवं आर्थिक विकास की दिशा में अग्रसर हैं। ब्रह्मपुत्र केवल एक नदी नहीं है बल्कि यह हमारी जीवनरेखा, हमारा इतिहास और हमारा भविष्य है।” केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि नयी अवसंरचना रसद को मजबूत करेगी, आवागमन को बढ़ावा देगी और पूर्वोत्तर में व्यापार एवं पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर प्रदान करेगी। बोगीबील में सीमा शुल्क एवं आव्रजन परिसर को एक आधुनिक पर्यटन-सह-कार्गो टर्मिनल के रूप में विकसित किया गया है, जो सीमा शुल्क, आव्रजन एवं आईडब्ल्यूएआई प्रशासनिक कार्यों को एक ही परिसर में एकीकृत करता है। इस सुविधा में समर्पित आगमन एवं प्रस्थान प्रतीक्षा हॉल, कार्गो भंडारण क्षेत्र, प्रशासनिक भवन, कर्मचारियों के लिए सुविधाएं एवं एकीकृत सुरक्षा प्रणाली शामिल हैं, जिनका उद्देश्य एनडब्ल्यू-2 के साथ परिचालन दक्षता में सुधार करना तथा भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्गों के अंतर्गत व्यापार को सुविधाजनक बनाना है। धुबरी सीमा शुल्क एवं आव्रजन परिसर को पश्चिमी असम में नियामक निरीक्षण को बढ़ावा देने एवं आयात-निर्यात-आयात परिचालन को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है, जिससे इस शहर को अंतर्देशीय जल परिवहन और बांग्लादेश एवं भूटान की सीमा पार व्यापार के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित किया जा सके। डिब्रूगढ़ में पुनर्निर्मित हेरिटेज भवन में स्थापत्य विशेषताओं एवं जीर्णोद्धार के साथ-साथ उन्नत परिचालन अवसंरचना भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, यह भवन एनडब्ल्यू-2 पर आईडब्ल्यूएआई की प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करेगा तथा नदी पर्यटन को बढ़ावा देगा और क्षेत्र की स्थापत्य विरासत को संरक्षित करेगा। राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अंतर्गत, पूर्वोत्तर की 20 नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है, जिनमें ब्रह्मपुत्र (उत्तर-पश्चिम-2), बराक (उत्तर-पश्चिम-16), धनसिरी (उत्तर-पश्चिम-31) और कोपिली (उत्तर-पश्चिम-57) नदियों का सक्रिय रूप से विकसित किया जा रहा है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव, विजय कुमार और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष, सुनील पालीवाल ने परिवहन के एक व्यावहारिक वैकल्पिक साधन के रूप में अंतर्देशीय जलमार्गों को मजबूत करने तथा व्यापार एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक नदी-आधारित संपर्क को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार की पहलों पर प्रकाश डाला। केंद्रीय मंत्री ने आशा व्यक्त किया कि राष्ट्रीय जलमार्ग-2 पर विकसित की जा रही अवसंरटना पूर्वोत्तर को विकास के इंजन के रूप में स्थापित करने की कोशिश को बढ़ावा देगी। इन परियोजनाओं के माध्यम से रसद लागत में कमी आने, सीमा पार व्यापार मजबूत होने, यात्री एवं माल ढुलाई में सुधार होने तथा पूर्वोत्तर में एक भरोसेमंद एवं सतत आर्थिक गलियारे के रूप में ब्रह्मपुत्र की भूमिका को सुदृढ़ बनाने की उम्मीद है।

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