मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में मंगलवार को संवाददाताओं को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में जल शक्ति मंत्रालय के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन को बुनियादी ढांचे के निर्माण से लेकर सेवा वितरण के स्तर तक पुनर्गठित किया जाना है। जल जीवन मिशन के पुनर्गठन के लिए मंत्रिमंडल ने इसके कुल परिव्यय को बढाकर 8 लाख 69 हजार करोड रुपये कर दिया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 3 लाख 59 हजार करोड़ रुपये की सहायता शामिल है। मंत्रिमंडल ने इसके साथ ही एक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा, “सुजलम भारत”, स्थापित करने को भी मंजूरी दी है। इसके तहत प्रत्येक गांव को एक विशिष्ट सुजल गांव/सेवा क्षेत्र आईडी आवंटित की जाएगी। इससे स्रोत से नल तक संपूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण किया जाएगा। मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा देने का फैसला किया है। मदुरै शहर में स्थित मदुरै हवाई अड्डा राज्य के सबसे पुराने हवाई अड्डों में से एक है। यह दक्षिणी तमिलनाडु के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार और पर्यटन तथा तीर्थयात्रा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है। मदुरै हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा देने से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति मिलेगी। अंतर्राष्ट्रीय तीर्थयात्रियों और व्यवसायों को आकर्षित करने की हवाई अड्डे की क्षमता शहर के ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप है।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बीच, मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना सेक्शन से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को जोडने के लिए ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी परियोजना के लिए 3 हजार 630 करोड 77 लाख रुपये मंजूर किए हैं। कुल करीब साढ़े 31 किलोमीटर लंबा यह गलियारा दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सीधे और तीव्र गति का संपर्क जरिया बनेगा। इससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ावा मिलेगा। आर्थिक मामलों की समिति ने एनएच-752डी के बदनवार-पेटलावाद-थंदला-तिमरवानी खंड से 80दशमलव45 किलोमीटर लंबे चार-लेन कॉरिडोर के विकास को भी मंजूरी दी है। इसपर कुल 3 हजार 839 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत आएगी। यह कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर तिमरवानी इंटरचेंज से जोड़ेगा। प्रस्तावित चार-लेन कॉरिडोर परियोजना का प्रमुख उद्देश्य यात्रा को सुगम बनाने के साथ ही यात्रा समय में लगभग एक घंटे की कमी लाना है। कैबिनेट समिति ने रेल मंत्रालय की दो परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत 4 हजार 474 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं में सैंथिया-पाकुर चौथी लाइन और संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन बनाया जाना शामिल हैं। इससे भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा।
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