मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में चल रहे पश्चिम एशिया संकट के मुख्य पहलुओं पर चर्चा करते हुए शांति के लिए संवाद व कूटनीति को ही एकमात्र रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने मामले में अपना स्पष्ट रुख रखते हुए तनाव में कमी, हिंसा की रोकथाम और शीघ्र शांति समाधान की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने हॉर्मुज़ जलडमरूमार्ग को फिर से खोलने और व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए भारत की ओर से मांग को दोहराया। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है और इससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट उत्पन्न हुआ है, जिसका भारत पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
आप को बता दे, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संकट के कारण व्यापार मार्ग बाधित हो रहे हैं और पेट्रोल, डीजल, गैस व उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि लगभग एक करोड़ भारतीय गल्फ देशों में रहकर काम करते हैं और उनकी जान‑माल व रोजगार की सुरक्षा भारत की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी बताया कि हॉर्मुज़ जलडमरूमार्ग पर कई जहाज़ अटके हुए हैं और इन पर भारतीय चालक दल भी मौजूद हैं। कल लोकसभा में भी उन्होंने स्थिति व सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों को 11 वर्षों में 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर लिया है, जिससे किसी एक क्षेत्र की अधिक निर्भरता कम हुई है।
Image source: प्रधानमंत्री आवास वेबसाइट / राज्यसभा लाइव कवरेज
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