मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला कल कोलकाता में पश्चिम बंगाल विधान सभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन सत्र में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी, संसदीय कार्य तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, पश्चिम बंगाल विधान सभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भाग लेंगे। पश्चिम बंगाल विधान सभा के अध्यक्ष रथीन्द्र बोस स्वागत भाषण देंगे और पश्चिम बंगाल सरकार के संसदीय कार्य मंत्री डॉ. शंकर घोष धन्यवाद प्रस्ताव पेश करेंगे। कार्यक्रम के दौरान विधायी कार्य के प्रमुख आयामों पर केन्द्रित तकनीकी सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिनमें ‘एक प्रभावी विधायक कैसे बनें’, संसदीय परंपराएं, परिपाटी एवं शिष्टाचार, प्रश्नोत्तर तथा अन्य प्रक्रियात्मक साधनों के माध्यम से कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करना, भारतीय संसद की समिति प्रणाली, निजी सदस्य विधेयकों सहित विधायी प्रक्रिया, संसद में वित्तीय कार्य एवं बजटीय प्रक्रिया, संसदीय विशेषाधिकार एवं आचारनीति तथा राष्ट्रीय ई-विधान अनुप्रयोग (NeVA) जैसे विषय शामिल हैं। इन सत्रों की अध्यक्षता तथा संबोधन विभिन्न राज्यों के विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों, संसद सदस्यों, संवैधानिक विशेषज्ञों तथा देशभर के वरिष्ठ संसदीय विशेषज्ञों द्वारा किए जाएंगे।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पहल से विचारों तथा सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ प्रतिभागियों की विधायी प्रक्रियाओं, संसदीय संस्थाओं और लोकतांत्रिक शासन के प्रति समझ और भी सुदृढ़ होने की अपेक्षा है। प्रबोधन कार्यक्रम का समापन 4 जुलाई, 2026 को पश्चिम बंगाल विधान सभा के ऐतिहासिक सदन कक्ष में होगा, जिसमें राज्यपाल आर. एन. रवि समापन संबोधन देंगे और अंतिम सत्र को लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. आशीम कुमार घोष, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, पश्चिम बंगाल विधान सभा के अध्यक्ष रथीन्द्र बोस तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम लोक सभा सचिवालय के पार्लियामेंटरी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज़ (पीआरआईडीई) द्वारा पश्चिम बंगाल विधान सभा के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है ताकि नवनिर्वाचित सदस्यों को समिति प्रणाली, वित्तीय पर्यवेक्षण, संसदीय विशेषाधिकार और विधानसभाओं में डिजिटल पहलों सहित संसदीय एवं विधायी कार्यप्रणाली के विविध पहलुओं से अवगत कराया जा सके और विधायकों, पीठासीन अधिकारियों तथा संसदीय विशेषज्ञों के बीच संवाद व अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए एक प्रभावी मंच उपलब्ध कराया जा सके।
News Source : Social Media
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