मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, झारखंड और ओडिशा में लू के कारण कुल नौ लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा 1300 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को झारखंड में लू लगने से चार लोगों की मौत हो गई। जबकि पूर्वी राज्य के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी के बीच 1,326 अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। ओडिशा सरकार ने भी शुक्रवार को लू लगने से अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि की है। गर्मी से जुड़ी बीमारी से 18 और लोगों की मौत की जांच की जा रही है।
मीडिया में आई खबर के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (झारखंड) के मिशन निदेशक डॉ. आलोक त्रिवेदी ने बताया कि झारखंड में लू लगने से चार लोगों की मौत हो गई। जिसमें तीन लोग पलामू में और एक व्यक्ति की जमशेदपुर में मौत हो गई। हालांकि ये मौतें अस्पतालों में नहीं हुईं। गर्मी से जुड़ी समस्याओं के कारण विभिन्न जिलों में 1,326 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है। इनमें से अब तक 63 लोगों में लू लगने की पुष्टि हुई है।
मीडिया सूत्रों के अनुसार, उन्होंने यह भी बताया कि सभी जिला अस्पतालों और अन्य चिकित्सा सुविधाओं को लू लगने वाले रोगियों को वातानुकूलित कमरे और खाली बिस्तर रखने को कहा है। झारखंड के 24 जिलों में से अधिकांश में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया है। वहीं डाल्टनगंज और गढ़वा पर पारा 47 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंसानों के साथ-साथ बढ़ता तापमान जानवरों, खास तौर पर चमगादड़ों को भी प्रभावित कर रहा है। अधिकारियों ने बताया कि हजारीबाग, रांची, गढ़वा और पलामू समेत कई अन्य हिस्सों से चमगादड़ों की मौत की सूचना मिली हैं। डॉ. त्रिवेदी ने बताया कि अक्सर देखा गया है कि उच्च तापमान के दौरान चमगादड़ मर जाते हैं।
मीडिया सूत्रों के अनुसार, यही नहीं गढ़वा में स्थानीय लोगों के मृत चमगादड़ों को खाने की खबरें आ रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि चमगादड़ों को खाने वाले लोगों को अलग रखा गया है। इन लोगों को निगरानी में रखा गया है। उनके नमूने आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) भेजे जाएंगे। डॉ. त्रिवेदी ने बताया कि हम मृत चमगादड़ों को सही तरीके से दफना रहे हैं।
मीडिया में आई खबर के अनुसार, ओडिशा के विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) सत्यब्रत साहू के बताया कि बालासोर, ढेंकनाल, मयूरभंज, सोनपुर और बोलनगीर में 1-1 व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं सरकार को सनस्ट्रोक से 18 संदिग्ध व्यक्तियों की मौतों की खबर मिली है। इनमें से 12 व्यक्ति सुंदरगढ़ जिले के और छह झारसुगुड़ा जिले के हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मौतों का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही सामने आएगा।
मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सुंदरगढ़ के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट आशुतोष कुलकर्णी ने कहा कि वर्तमान में राउरकेला के एक निजी अस्पताल में हीटस्ट्रोक के 10 मरीजों का उपचार चल रहा है। 23 व्यक्ति अभी भी राउरकेला सरकारी अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी हालत अभी गंभीर बताई जा रही है।
मीडिया सूत्रों के अनुसार, वहीं झारसुगुड़ा के मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी जयकृष्ण नायक ने बताया कि जिले में छह अप्राकृतिक मौत के मामले सामने आए हैं। इनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने मौतों की जांच के लिए राउरकेला में एक विशेष टीम भेजने की बात कही है।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया कि अधिकतर मौतें पीक आवर्स के दौरान काम करने के कारण हुई हैं। यह हीटवेव मुख्य रूप से मजदूरों और ट्रक ड्राइवरों को प्रभावित कर रही है। जिला प्रशासन को मौतों की जांच करने के निर्देश मिले है। वहीं आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत पीक आवर्स पर श्रमिकों को काम पर न लगाने की सख्त चेतावनी दी गई है।
मीडिया में आई खबर के अनुसार, जिला कलेक्टरों को पीने के पानी की उपलब्धता और हीटवेव के बारे में जागरूकता बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारतीय मौसम विभाग ने भी 3 जून तक हीटवेव की स्थिति जारी रहने का पूर्वानुमान लगाए जाने के बाद अविभाजित संबलपुर, सुंदरगढ़, बोलनगीर, कालाहांडी और बौध जिलों में रहने वाले लोगों को पीक आवर्स में घर के अंदर रहने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि तटीय क्षेत्रों में भी गर्म और आर्द्र मौसम की स्थिति रहने की संभावना है।
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