मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारत के वरिष्ठ राजनयिक जेपी सिंह ने अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार में विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी के साथ बातचीत की। इस दौरान सुरक्षा, व्यापार और मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के तरीकों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई। अफगानिस्तान की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जेपी सिंह विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान क्षेत्र के राजनयिक हैं। चर्चा के दौरान सिंह ने अफगानिस्तान के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने और चाबहार बंदरगाह से व्यापार बढ़ाने में भारत की रुचि से अवगत कराया। हालांकि बयान में इस बात का जिक्र नहीं है कि यह वार्ता कहां हुई। माना जा रहा है कि अफगानिस्तान मामलों के प्रभारी राजनयिक सिंह ने काबुल में मुत्तकी के साथ वार्ता की।
मीडिया सूत्रों के अनुसार, बयान में कहा गया है कि तालिबान के विदेश मंत्री मुत्तकी ने मानवीय सहायता के लिए भारत का आभार जताया। मुत्तकी ने कहा कि अफगान सरकार भारत के साथ राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना चाहती है। मुत्तकी ने अफगान व्यापारियों, मरीजों और छात्रों के लिए भारत की तरफ से वीजा जारी करने की सुविधा प्रदान करने का अनुरोध किया।
मीडिया में आई खबर के अनुसार, भारत ने अभी तक अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है। भारत काबुल में समावेशी सरकार के गठन की वकालत कर रहा है और इस बात का आश्वासन चाहता है कि अफगान धरती का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए न हो। हालांकि, भारत शुरू से ही मानवीय संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान को निर्बाध सहायता जारी रखने के पक्ष में है।
मीडिया सूत्रों के अनुसार, भारत ने जून 2022 में काबुल में अपने दूतावास में तकनीकी टीम तैनात करके अफगानिस्तान में फिर से अपनी राजनयिक उपस्थिति स्थापित की है। अगस्त 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करने के बाद सुरक्षा पर चिंताओं के कारण भारत ने दूतावास से अपने अधिकारियों को वापस बुला लिया था।
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