उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने दिल्ली विश्वविद्यालय में नशामुक्त परिसर अभियान का किया शुभारंभ

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने दिल्ली विश्वविद्यालय में नशामुक्त परिसर अभियान का किया शुभारंभ

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं को नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से बचाने और विकसित तथा आत्मनिर्भर भारत दृष्टियोजना साकार करने के निरंतर और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर देते हुए आज दिल्ली विश्वविद्यालय में नशामुक्त परिसर अभियान आरम्भ किया। उपराष्ट्रपति ने सशक्त राष्ट्रों के लिए सशक्त नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल अकादमिक शिक्षा के केंद्र भर नहीं बल्कि ऐसे संस्थान होते हैं जहां मूल्य संस्कारित किए जाते हैं, नेतृत्व पोषित किया जाता है और राष्ट्र का भविष्य गढ़ा जाता है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय जैसा प्रमुख शिक्षण संस्थान नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के खिलाफ दृढ़ रुख अपनाता है, तो यह समाज को सशक्त संदेश देता है। उपराष्ट्रपति ने नशा मुक्त परिसर अभियान के अंतर्गत समर्पित ई-संकल्प मंच ( https://pledge.du.ac.in/home ) और मोबाइल एप्लिकेशन का भी शुभारंभ किया और देश के सभी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों से इसमें सक्रियता से भाग लेने और नशा मुक्त परिसर का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी सुनिश्चित करने को कहा कि नशा मुक्त परिसर अभियान सभी केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों का अभिन्न हिस्सा बने। उपराष्ट्रपति ने भारत को युवा ऊर्जा से पूर्ण राष्ट्र बताते हुए कहा नशीले पदार्थों का इस्तेमाल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि गंभीर सामाजिक चुनौती, सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट और देश के जनसांख्यिकीय लाभ के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि मादक द्रव्य शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक प्रदर्शन, पारिवारिक सामंजस्य और  उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के व्यापार का आतंकवाद से संबंध होने से यह राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्रभावित करता है।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न तभी साकार हो सकता है जब युवा स्वस्थ और नशे से मुक्त हों और उनका जीवन उद्देश्यपूर्ण हो। उन्होंने कहा कि नशे से मुक्त युवा कौशल प्राप्त करने, उद्यमिता को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास तथा राष्ट्रीय विकास में सार्थक योगदान देने में अधिक सक्षम होते हैं। उपराष्ट्रपति ने शिक्षा और संस्कृति की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारत की प्राचीन परंपराओं में आत्म-अनुशासन, मानसिक संतुलन तथा मन और शरीर की पवित्रता को बहुत महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि यही भावना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ध्यान और योग को बढ़ावा देने के प्रयासों में भी परिलक्षित होती है। उपराष्ट्रपति ने युवाओं की ऊर्जा- अनुसंधान, नवोन्मेष, स्वयंसेवा और राष्ट्र निर्माण में लगाने के लिए ‘माई भारत पोर्टल’ और ‘पीएम अनुसंधान योजना’ जैसी पहल का उल्लेख किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020- मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल और छात्र कल्याण पर जोर देते हुए यह समग्र दृष्टिकोण दर्शाती है। उन्होंने कहा कि नशामुक्त परिसर अभियान जैसी पहल सुरक्षित, समावेशी और पठन-पाठन का वातावरण निर्मित करती है। उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के जागरूकता कार्यक्रमों, परामर्श तंत्रों, विद्यार्थी नेतृत्व पहल और हितधारकों के सहयोग को समेकित करने की सराहना करते हुए कहा कि जब विद्यार्थी परिवर्तन के दूत बनते हैं, तो इसका प्रभाव परिसरों से परे परिवारों और समुदायों तक पहुंचता है। उन्होंने विद्यार्थियों से मादक पदार्थों से सतर्क रहने, दोस्तों को इससे उबारने, और मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाकर उदाहरण प्रस्तुत करने का आह्वान किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के नशामुक्त परिसर का आदर्श बनने का विश्वास व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि स्वस्थ, मजबूत और विकसित राष्ट्र का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए नशामुक्त भारत अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह, वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित थे।

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