मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ओडिशा सरकार की ओर से 21 जनवरी से तीन दिवसीय राज्य स्तरीय ‘मत्स्य-प्राणी समावेश’ का आयोजन किया जाएगा। कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग के तत्वावधान में होने वाला यह भव्य आयोजन भुवनेश्वर के बरमुंडा स्थित जनता मैदान में संपन्न होगा। आयोजन का उद्देश्य मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि करना है।मत्स्य पालन एवं पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मल्लिक ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी मेले का उद्घाटन करेंगे, जबकि राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति समापन समारोह में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में 8,000 से अधिक किसानों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के भाग लेने की उम्मीद है।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस तीन दिवसीय मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और उद्यमी भाग लेंगे। मेले में उन्नत नस्ल के पशुओं के साथ-साथ मत्स्य पालन की आधुनिक पद्धतियों का प्रदर्शन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह मंच किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी और विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर देगा। मेले में पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी नवीनतम मशीनरी व उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। विशेषज्ञ किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन के उपाय बताएंगे। इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों और उद्यमियों को सम्मानित भी किया जाएगा। निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष सत्रों का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में तकनीकी सत्र, सेमिनार, जीवित पशु और मछलियों का प्रदर्शन, अनुभव साझा करने के सत्र आयोजित होंगे। खास आकर्षण ‘मंत्री से पूछें’ सत्र होगा, जिसमें किसान सीधे मंत्री से अपने सवाल पूछ सकेंगे।मेले में विभिन्न सरकारी विभागों, कंपनियों, एजेंसियों और गैर-सरकारी संगठनों के 208 स्टॉल लगाए जाएंगे। आयोजन के दौरान पालतू जानवरों का फैशन शो, मैराथन, वाद-विवाद प्रतियोगिता, लाइव सीफूड किचन, वर्चुअल रियलिटी फार्म टूर, ड्रोन शो और पेंटिंग प्रदर्शनी जैसी गतिविधियां भी होंगी। पत्रकारों से बातचीत में मंत्री मल्लिक ने बताया कि राज्य में प्रति वर्ष 11.72 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हो रहा है और ओडिशा जल्द ही इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष राज्य ने 4,700 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात किया है।सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और राज्य में नीली क्रांति व दुग्ध उत्पादन को नई गति मिलेगी।
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