दिल्ली पुलिस ने फर्जी कंपनियों के जरिए संचालित 180 करोड़ रुपये के साइबर अपराध नेटवर्क का किया भंडाफोड़, 2 गिरफ्तार

0
73
दिल्ली पुलिस ने फर्जी कंपनियों के जरिए संचालित 180 करोड़ रुपये के साइबर अपराध नेटवर्क का किया भंडाफोड़, 2 गिरफ्तार

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने फर्जी कंपनियों के जाल के माध्यम से संचालित एक बड़े साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और देश भर में सामने आए लगभग 180 करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी मामलों से जुड़े लेनदेन का खुलासा किया गया है। यह कार्रवाई ऑपरेशन साइ-हॉक के तहत की गई थी, जिसे संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क को खत्म करने और धोखाधड़ी से प्राप्त धन को स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अवैध वित्तीय चैनलों को अवरुद्ध करने के लिए शुरू किया गया था। नई दिल्ली जिले के साइबर पुलिस स्टेशन के अनुसार, यह अभियान साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को वैध बनाने के लिए कथित तौर पर बनाए गए फर्जी खातों, नकदी संचालकों और शेल कंपनियों पर केंद्रित था। जांचकर्ताओं ने जिले में संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों से जुड़े कई प्रमुख स्थानों की पहचान की। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज शिकायतों की जांच से पता चला कि आईडीएफसी बैंक के एक खाते का बार-बार धोखाधड़ी से प्राप्त धन को प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जा रहा था। यह खाता कनॉट प्लेस स्थित मेसर्स कुद्रेमुख ट्रेडिंग (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर पंजीकृत था।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस ने बताया कि यह खाता अवैध लेनदेन के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते के सभी लक्षणों से युक्त था, और कई शिकायतों से संगठित साइबर अपराध की ओर इशारा मिला। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत 19 नवंबर, 2025 को एफआईआर दर्ज की गई और जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पता चला कि कंपनी का खाता राजेश खन्ना के नाम से खोला गया था, जिसने बाद में खुलासा किया कि उसने सुशील चावला और राजेश कुमार शर्मा के निर्देशों पर काम किया था। जांचकर्ताओं ने पाया कि ये दोनों फंड ट्रांसफर को नियंत्रित करते थे और कथित तौर पर पैसे की हेराफेरी के लिए 20 फर्जी कंपनियां खोली थीं। आगे की जांच में लगभग 180 करोड़ रुपये की 176 साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों से संबंध सामने आए, जिनमें फंड इन कंपनियों के कई स्तरों के माध्यम से ट्रांसफर किया गया था। पुलिस ने बताया कि राजेश खन्ना की नोएडा में मौत हो गई है। शेष आरोपी सुशील चावला और राजेश कुमार ने शुरू में जांच में सहयोग किया, लेकिन बाद में नोटिसों से बचते हुए और सहयोग न करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। डिजिटल साक्ष्यों से पता चलता है कि खन्ना को कथित तौर पर मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया गया था, जबकि आरोपियों ने पश्चिम बंगाल में इसी तरह के धोखाधड़ी के मामलों में कथित तौर पर शामिल एक व्यक्ति से संबंध होने का दावा किया है। दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किए गए हैं। आगे की जांच जारी है और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के साथ मिलकर उपकरणों और बैंक खातों की जांच की जा रही है ताकि देशव्यापी संबंध स्थापित किया जा सके।

#dailyaawaz #newswebsite #news #newsupdate #hindinews #breakingnews #headlines #headline #newsblog #hindisamachar #latestnewsinhindi

Hindi news, हिंदी न्यूज़ , Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi, ताजा खबरें

Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here