मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में वर्ष 2011 से जारी सभी जाति प्रमाण पत्रों की जांच का आदेश दिया है। अधिकारियों ने कहा है कि पिछले 14 वर्षों में इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता और वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अवधि के दौरान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लगभग एक करोड़ 69 लाख जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। इनमें से कई प्रमाण पत्र दुआरे सरकार योजना के अंतर्गत बनाए गए थे। राज्य में हाल ही में हुए मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान हटाए गए नामों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
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