‘पाकिस्तान से निकलें अमेरिकी अधिकारी’, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कराची और लाहौर दूतावास खाली करने का दिया आदेश

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'पाकिस्तान से निकलें अमेरिकी अधिकारी', अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कराची और लाहौर दूतावास खाली करने का दिया आदेश

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कराची और लाहौर से अपने गैर-आपातकालीन वाणिज्य दूतावास कर्मचारियों को निकालने का आदेश दिया है। बुधवार को अमेरिकी विदेश विभाग ने सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के कराची और लाहौर स्थित वाणिज्य दूतावासों में तैनात गैर-आपातकालीन अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों तथा उनके परिवार के सदस्यों को वहां से तुरंत चले जाने का निर्देश जारी किया। इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया कि इस आदेश से राजधानी में स्थित दूतावास की परिचालन स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा है और वह सामान्य रूप से कार्यरत रहेगा।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह फैसला अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाइयों के बाद पूरे मध्य पूर्व में फैले तनाव के बीच लिया गया है। पाकिस्तान में इन घटनाओं के विरोध में पिछले दिनों हिंसक प्रदर्शन हुए, जिनमें सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर धावा बोलने की कोशिश की। एएफपी के अनुसार, सप्ताहांत में हुए इन प्रदर्शनों में कम से कम 25 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। लाहौर और कराची में हिंसा भड़की, जिसके बाद वाणिज्य दूतावासों ने वीजा और अन्य सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए सऊदी अरब, ओमान और साइप्रस में भी गैर-आपातकालीन कर्मचारियों तथा उनके परिवारों को निकलने की अनुमति दे दी है। साथ ही अमेरिकी नागरिकों को इन तीनों देशों की यात्रा पर पुनर्विचार करने की सलाह जारी की गई है। साइप्रस से जुड़ी यह सलाह खासतौर पर ध्यान आकर्षित कर रही है, क्योंकि यह यूरोपीय संघ का सदस्य देश है और सामान्य रूप से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। पाकिस्तान में अमेरिकी मिशन ने नागरिकों से सतर्क रहने, भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर रहने और स्थानीय समाचारों पर नजर रखने की अपील की है। अमेरिकी यात्रा सलाह में पाकिस्तान के लिए पहले से ही ‘पुनर्विचार करें’ स्तर की चेतावनी जारी है, जिसमें आतंकवाद, अपराध और अपहरण के खतरे का जिक्र किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-पाकिस्तान सीमा के निकट होने और वहां शिया समुदाय की मौजूदगी के कारण पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन और हिंसा का खतरा बढ़ सकता है।

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