पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष को देखते हुए ईंधन आपूर्ति और मुद्रास्फीति पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की

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पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष को देखते हुए ईंधन आपूर्ति और मुद्रास्फीति पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति के बीच आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा और उद्योग व आपूर्ति व्‍यवस्‍था को मज़बूत करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं बनी हुई हैं। पीएम मोदी ने यह बात कल शाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के साथ एक उच्च-स्तरीय वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता के दौरान कही। इस बैठक का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भारत पर इसके संभावित असर को देखते हुए देश की तैयारियों की समीक्षा करना था। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सतर्कता, पहले से योजना बनाने और केंद्र व राज्यों के बीच बिना किसी रुकावट के तालमेल बनाए रखने पर ज़ोर दिया। उन्होंने देश पर किसी भी संभावित असर को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए ‘टीम इंडिया’ के रूप में मिलकर काम करने का आह्वान किया। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि ‘टीम इंडिया’ के तौर पर मिलकर काम करते हुए देश उभरती हुई चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर लेगा। उन्होंने कहा कि बदलती स्थिति के बीच लगातार नज़र बनाए रखने और तेज़ी से बदलते हालात के हिसाब से कदम उठाने की ज़रूरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले अनुभवों का ज़िक्र करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र और राज्यों ने ‘टीम इंडिया’ के तौर पर काम किया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनौतियों से निपटने में सहयोग की यही भावना अहम होगी और कहा कि सामूहिक ज़िम्मेदारी और तालमेल ही भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं। राज्यों की भूमिका पर प्रधानमंत्री ने केंद्र के साथ बिना किसी रुकावट के बातचीत करने और ज़मीनी स्तर पर काम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। पीएम मोदी ने राज्यों से अपील की कि वे आपूर्ति व्‍यवस्‍था को बनाए रखना सुनिश्चित करें और जमाखोरी तथा मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाएं। उन्होंने राज्य और ज़िला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाने और प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस महीने की 3 तारीख से एक अंतर-मंत्रालय समूह प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा कर रहा है और फैसले ले रहा है।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी ने कृषि क्षेत्र में खासकर खरीफ के मौसम से पहले पर्याप्त खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर पहले से योजना बनाने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने अफवाहों के प्रति आगाह किया और राज्यों को सलाह दी कि वे घबराहट रोकने के लिए सही जानकारी फैलाएं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती और तटीय राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि शिपिंग, ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति और समुद्री गतिविधियों से जुड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सके। उन्होंने उन राज्यों से भी कहा जिनके नागरिक पश्चिम एशिया में हैं वे प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हेल्पलाइन शुरू करें और सहायता व्यवस्था बनाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक और आपूर्ति व्यवस्था को मज़बूत करने के हालिया प्रयास फायदेमंद साबित हो रहे हैं। उन्होंने उत्पादन और रोज़गार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उद्योग और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने का आह्वान किया साथ ही सभी प्रशासनिक स्तरों पर नियमित समीक्षा और निगरानी पर भी ज़ोर दिया। पीएम मोदी ने राज्यों से सौर ऊर्जा, जैव ईंधन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की गति तेज़ करने का आग्रह किया और पाइप वाली प्राकृतिक गैस के बुनियादी ढांचे का विस्तार करने को भी कहा। उन्होंने राज्यों के सक्रिय सहयोग से तेल और गैस की घरेलू खोज को बढ़ाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए तत्‍पर है और तत्‍काल कदम उठा रही है जैसे कि लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस-एलपीजी की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना और पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी कम करना। अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हालात से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की प्रशंसा की। उन्होंने इस संकट के दौरान विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सहायता सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा अलग-अलग देशों से किए गए कूटनीतिक संपर्क की भी तारीफ़ की। मुख्यमंत्रियों ने ईंधन पर एक्साइज़ ड्यूटी कम करने के फ़ैसले का ज़ोरदार स्वागत किया और कहा कि इससे दुनिया भर में जारी अनिश्चितताओं के बीच नागरिकों को काफ़ी राहत मिलेगी। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कमर्शियल एलपीजी का कोटा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर संकट से पहले के स्तर का 70 प्रतिशत करने के फ़ैसले का भी स्वागत किया। मुख्यमंत्रियों ने विश्‍वास जताया कि हालात स्थिर बने हुए हैं पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और ज़रूरी चीज़ों की बिना किसी रुकावट के सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की व्यवस्था भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि बदलते हालात को संभालने और नागरिकों के हितों की रक्षा करने के लिए वे केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

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