मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत 2035 तक विश्व के शीर्ष चार सेमीकंडक्टर विनिर्माण देशों में शामिल होने की राह पर अग्रसर है। नई दिल्ली में स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर उद्योग के प्रतिनिधियों से उन्होंने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर कार्यक्रम एक दीर्घकालिक और सुनियोजित पहल के रूप में तैयार किया गया है। इसमें स्टार्टअप और स्थापित कंपनियां दोनों शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेखांकित किया कि देश ने आने वाले वर्षों में दो-नैनोमीटर क्षमताओं सहित उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्रों के लिए रूपरेखा तैयार कर ली है।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत कंप्यूट, नेटवर्किंग, पावर मैनेजमेंट, सेंसर और मेमोरी सहित प्रमुख सिस्टम श्रेणियों में एक व्यापक सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के अगले चरण का लक्ष्य आने वाले वर्षों में कम से कम 50 फैबलेस कंपनियों को समर्थन देना, घरेलू टेप-आउट सुविधाओं को मजबूत करना और उन्नत सेमीकंडक्टर क्षमताओं का विकास करना है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत समर्थित स्टार्टअप्स ने लगभग चार सौ तीस करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल निवेश आकर्षित किया है। यह देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि 2029 तक देश घरेलू अनुप्रयोगों के लगभग 70 से 75 प्रतिशत के लिए आवश्यक चिप्स डिज़ाइन और निर्माण करने की क्षमता हासिल कर लेगा। उन्होंने घोषणा की कि सेमीकंडक्टर और अन्य गहन प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को सम्मानित करने के लिए डीप टेक पुरस्कारों की शुरुआत की जाएगी।
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