भगवान का स्वरूप आनंद मय है, इसलिए सदा आनंद में रहने वाले लोगों को भगवान सुलभ होते हैं। प्रयागराज की अमृतधारा त्रिवेणी के मध्य गंगा जमुना के संगम तट पर महर्षि स्मारक पर शिव पुराण की पुनीत कथा चल रही है। विद्वान् आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी जी अत्यन्त श्रेष्ठ कथा सुना रहे हैं। आध्यात्मिक जनजागरण के साथ ही लोक कल्याण की भावना माघ मेले में विस्तार को प्राप्त हो रही है इस माघ महीने में आचार्य जी ने भगवान को प्रत्यक्ष अनुभव कराया है, यह ज्ञान गंगा है! जिसे सरस्वती कहते हैं। इसमें स्नान होने का फल ही त्रिवेणी स्नान है। आज की कथा में वृक्षारोपण, पर्यावरण शुद्धि एवं जल संरक्षण पर आचार्य जी ने अनेक उदाहरणों के माध्यम से लोगों को प्रेरित किया। वेद विद्या मार्तंड ब्रह्मचारी डॉ गिरीश जी के संयोजन में महर्षी आश्रम में अनेक विद्वानों की उपस्थिति में यह कथा प्रसाद वितरित हो रहा है। आचार्य बसंत जी एवं सुनील जी सहित अनेक गणमान्य जन्म कथा में उपस्थित हैं।
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