भोपाल: शहर के अयोध्या नगर स्थित महर्षि विद्या मंदिर के प्रांगण में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर आज श्रद्धा और उल्लास का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रख्यात कथा व्यास आचार्य डॉ. निलिम्प त्रिपाठी ने जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का प्रसंग सुनाया, पूरा पाण्डाल ‘नंद के आनंद भयो’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा और पुष्प वर्षा के बीच श्रद्धालुओं ने नाचते-गाते हुए जन्मोत्सव मनाया।
आचार्यजी ने भगवान के अवतार के गूढ़ रहस्यों को सुलझाते हुए बताया कि हम डार्विन की थ्योरी नहीं मानते! उन्होंने
श्रीकृष्ण की जन्म लीला का सुन्दर दर्शन कराया। आचार्य जी ने बताया कि कंस के अहंकार रूपी कारागार में जब भक्ति का प्राकट्य हुआ, तब पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि “कृष्ण” का अर्थ ही है जो सबको आकर्षित करे।

नंदोत्सव का उल्लास अपूर्व रहा। वासुदेव जी द्वारा बाल कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार कराने और गोकुल पहुँचाने के प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। इसके पश्चात प्रतीकात्मक रूप से कान्हा के जन्म की बधाई गाई गई और खिलौने व मिठाइयां बांटी गईं। यह संदेश दिया गया कि परमात्मा प्रेम के वश में हैं।
आचार्य डॉ. निलिम्प त्रिपाठी जी का संदेश
“श्रीकृष्ण का अवतार धर्म की स्थापना और प्रेम के विस्तार के लिए हुआ था। आज समाज को कृष्ण के दर्शन के साथ-साथ उनके जीवन के प्रबंधन (Management) को समझने की भी आवश्यकता है। वे दुष्टों के लिए काल और भक्तों के लिए परम कृपालु हैं।”
चतुर्थ दिवस पर विद्यालय प्रांगण को विशेष रूप से सजाया गया था। भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की मनमोहक झांकी सजाई गई थी, जिसका श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ लिया। कार्यक्रम में पूर्व पार्षद गिरीश शर्मा सहित महर्षि विद्या मंदिर परिवार के सदस्यों, शहर के कई प्रबुद्ध नागरिक और धर्मप्रेमी सम्मिलित हुए।
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