मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा से सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 पास हो गया। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं में अनुचित तरीकों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। विधेयक में आरोपियों को 3 से 10 साल तक की सजा और न्यूनतम एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
मीडिया सूत्रों के अनुसार, इस विधेयक को 5 फरवरी को लोकसभा में पेश किया गया था। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) पेश किया। 6 फरवरी को विधेयक लोकसभा से पारित हो गया। अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल में इस विधेयक को मंजूरी दी थी। विधेयक में परीक्षाओं में गड़बड़ी करने पर अधिकतम 10 साल की जेल और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों ने लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों के हितों को प्रभावित किया है। इसे रोकना जरूरी है। ऐसा नहीं करना लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। बजट सत्र की शुरुआत पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा था कि सरकार परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ी को लेकर युवाओं की चिंताओं से अवगत है। इस दिशा में सख्ती लाने के लिए नया कानून बनाने का निर्णय लिया गया है। विधेयक का मकसद परीक्षाओं में अनुचित साधनों के उपयोग को रोकना है। संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी, बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान और केंद्र सरकार के विभाग और भर्ती के लिए उनके जुड़े कार्यालय द्वारा कराई जाने वाली परीक्षाएं इस विधयेक के दायरे में आएंगी।
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