मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां उसका वैज्ञानिक तंत्र अंतरिक्ष अन्वेषण और टीका विकास से लेकर क्वांटम प्रौद्योगिकी और गहरे समुद्र अभियानों तक विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक योगदान दे रहा है। उन्होंने ये बातें नई दिल्ली में आयोजित प्रथम भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी और क्षमता निर्माण आयोग के प्रशासनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहीं।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रशासन तथा शासन में औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के पहले बैच को प्रमाण पत्र और प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए। डॉ. सिंह ने कहा कि आधुनिक संस्थानों का नेतृत्व करने के लिए केवल वैज्ञानिक उत्कृष्टता ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व की भूमिकाओं में आने वाले वैज्ञानिकों को शासन, प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन क्षमताओं से भी लैस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक प्रायोगिक पहल तक सीमित नहीं रहना चाहिए और इसे एक नियमित राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण मंच के रूप में संस्थागत रूप देने का आह्वान किया। डॉ. सिंह ने प्रतिभागियों से कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने संगठनों में लागू करने और संस्थागत प्रणालियों और शासन प्रथाओं में सुधार करने में सक्षम परिवर्तनकारी एजेंट बनने का भी आग्रह किया।
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