मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक वार्ता का तीसरा दौर कल जिनेवा में शुरू होगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि कूटनीति को प्राथमिकता दी जाए तो एक अभूतपूर्व समझौता संभव है। जनवरी 2026 में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के बाद ईरान की सरकार को अंतरराष्ट्रीय जांच का सामना करना पड़ रहा है। मानवाधिकार समूहों की रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक कठिनाई और राजनीतिक परिवर्तन की मांगों से भड़के इस अशांति के दौरान लगभग 7 हजार लोग मारे गए और हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने 2003 के बाद से मध्य पूर्व में अपनी सबसे बड़ी सैन्य उपस्थिति दर्ज की है। इस बेड़े में दो विमानवाहक पोत स्ट्राइक समूह, यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड शामिल हैं। मुख्य विवाद ईरान के यूरेनियम संवर्धन को लेकर है, जिस पर अमेरिका का कहना है कि यह हथियार-ग्रेड स्तर तक नहीं पहुंचना चाहिए। हालांकि दोनों पक्ष शांतिपूर्ण समाधान की इच्छा व्यक्त करते रहे राष्ट्रपति ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर कूटनीति ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने में विफल रहती है तो सैन्य विकल्प अभी भी खुले रहेंगे।
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