केंद्रीय मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने आर के विश्वविद्यालय, राजकोट में “विकसित भारत युवा संवाद” को किया संबोधित

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केंद्रीय मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने आर के विश्वविद्यालय, राजकोट में “विकसित भारत युवा संवाद” को किया संबोधित

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राजकोट स्थित आरके विश्वविद्यालय में “विकसित भारत युवा संवाद” प्रेरक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें 1000 से अधिक छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ मनसुख मांडविया उपस्थित हुए और युवा शक्ति को भारत के विकास यात्रा की जिम्मेदारी संभालने के लिए प्रेरित किया। केंद्रीय मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने संवाद का शुभारंभ करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी केवल राष्ट्र का भविष्य ही नहीं है, बल्कि यह आज भी परिवर्तन की दिशा तय कर रही है। उन्होंने युवाओं से ‘नेशन फर्स्ट’ दृष्टिकोण अपनाने और भारत की विकास यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने नेतृत्व में नवीनता की आवश्यकता पर भी बाल दिया और 15 अगस्त 2024 को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान का स्मरण किया, जिसमें उन्होंने गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले 1 लाख युवाओं को देश की व्यवस्था में सम्मिलित करने की बात कही थी। डॉ मांडविया ने कहा कि नेतृत्व का निर्माण नीयत और कर्म से होता है। उन्होंने युवाओं को आगे बढ़कर सार्वजनिक जीवन में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवाओं द्वारा ठोस कदम उठाने के विषय पर बात करते हुए केन्द्रीय मंत्री डॉ मांडविया ने माई भारत पोर्टल (mybharat.gov.in) का उल्लेख किया, जो युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जुड़े अवसरों से जोड़ने और सेवा में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय बजट 2026 युवाओं की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है। इसके साथ ही उन्होंने ‘बजट क्वेस्ट’ जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो युवाओं को बजट को समझने की प्रक्रिया में सम्मिलित करती हैं, और ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (वी बी वाई अल डी)’ के माध्यम से जिम्मेदार और जागरूक युवा नेतृत्व तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने भारत की जड़ों से जुड़े रहने के महत्व पर भी बाल दिया। उन्होंने कहा कि पुरानी सोच को बदलने की आवश्यकता है और धोलावीरा जैसे ऐतिहासिक स्थलों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने “विकास भी, विरासत भी” के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया, ताकि हम अपनी संस्कृति को संजोते हुए प्रगति कर सकें। युवा संवाद में छात्रों की सक्रिय भागीदारी, विचार करने योग्य प्रश्न और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने की साझा प्रतिबद्धता देखने को मिली। कार्यक्रम का समापन एक रोचक संवाद के साथ हुआ, जिसमें छात्रों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र भी शामिल रहा। एनसीसी कैडेट्स ने माननीय मंत्री डॉ मनसुख मांडविया को एक पेंटिंग और आरके विश्वविद्यालय सोशल क्लब ने “बायोडायवर्सिटी बुक” भेंट की। संवाद सत्र का समापन विश्वविद्यालय के कार्यकारी उपाध्यक्ष डेनिश पटेल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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