मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उर्दू साहित्य की एक महान आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार बशीर बद्र का गुरुवार को मध्य प्रदेश के भोपाल में निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे। उनके परिवार के अनुसार, उन्होंने गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे अंतिम सांस ली। उन्हें गुरुवार सायं भोपाल टॉकीज के पास स्थित कब्रिस्तान में दफनाया गया। बशीर बद्र लंबे समय से स्मृति दोष से पीड़ित थे। साहित्य और संगीत नाटक अकादमी में योगदान के लिए उन्हें 1999 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही, 1999 में ही उन्हें काव्य संग्रह “आस” के लिए उर्दू साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बशीर बद्र ने उर्दू कविता को एक नई पहचान दी। उन्होंने सरल, रोजमर्रा की भाषा में लिखा। उनकी शैली पारंपरिक कवियों से अलग थी। उनकी ग़ज़लों में प्रेम, एकांत, रिश्ते और दैनिक जीवन का वर्णन है। उनके कई शेर आज भी मुशायरों में गाए जाते हैं और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जाते हैं। बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और बाद में मेरठ कॉलेज में उर्दू विभाग में व्याख्याता के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने 1990 तक वहां पढ़ाया। यह अवधि उनके काव्य सफर का सबसे महत्वपूर्ण चरण मानी जाती है। इसी दौरान उन्हें भारत और विदेश दोनों जगह पहचान मिली।
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