मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 206 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। ईडी ने बताया कि इन संपत्तियों में कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं के स्वामित्व वाली हरियाणा के सोनीपत जिले के कामासपुर में स्थित लगभग 8 दशमलव 3 एकड़ जमीन और व्यावसायिक इकाइयां शामिल हैं। निदेशालय ने दिल्ली पुलिस और उसकी आर्थिक अपराध शाखा की 26 एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की। जांच में पता चला कि कंपनी और उसके प्रमोटर हजारों घर खरीदारों को समय पर फ्लैट देने में विफल रहे। कुछ परियोजनाओं में तो 16 से 18 साल तक की देरी हुई।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने 2005 से 2014 के बीच सोनीपत में 23 आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू कीं और 14 हजार से अधिक खरीदारों से 4,619 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की। हालांकि, कई परियोजनाएं अभी भी अधूरी हैं। ईडी ने बताया कि प्रमोटरों ने परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय, सहायक कंपनियों और भूस्वामी कंपनियों को जमीन खरीदने और अन्य उद्देश्यों के लिए अग्रिम भुगतान के रूप में धनराशि हस्तांतरित कर दी। इससे पहले, ईडी ने इस मामले में 45 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की थी। इसके साथ ही जब्त की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 250 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
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