मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ के मौके पर आयोजित एक राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित किया। यह सेमिनार दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर इंडिपेंडेंस एंड पार्टीशन स्टडीज’ ने ‘इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च’ (आईसीएचआर) के सहयोग से आयोजित किया था। उपराष्ट्रपति ने सेमिनार में मौजूद विभाजन से बचे लोगों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया और कहा कि देश अपने इतिहास के “सबसे दुखद और अमानवीय अध्यायों में से एक” पर विचार करने के लिए एकजुट हुआ है। उन्होंने कहा कि जब भारत स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, तो देश को उन लोगों के बलिदान और पीड़ा को याद करने के लिए रुकना चाहिए जिन्होंने विभाजन का दौर देखा था।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, साथ ही उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर विभाजन से बचे लोगों को सम्मानित किया। यह सम्मान उनके साहस, दृढ़ता और विभाजन की यादों व अनुभवों को संजोकर रखने में उनके योगदान को देखते हुए दिया गया। इसके अलावा उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के मौके पर आईसीएचआर और दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी भी देखी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में दिखाई गई चीजे विभाजन की वजह से इंसानों को चुकानी पड़ी भारी कीमत की जबरदस्त याद दिलाती हैं।
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