मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान – आईआईटी बॉम्बे में एकीकृत कार्बन कैप्चर और उपयोग संयंत्र का उद्घाटन किया। उन्होंने भूवैज्ञानिक कार्बन डाइऑक्साइड पृथक्करण के लिए वैज्ञानिक ड्रिलिंग का भी शुभारंभ किया। संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने इस गंभीर वैश्विक समस्या का समाधान विकसित करने के लिए आईआईटी बॉम्बे को बधाई दी और घोषणा की कि इस परियोजना को अगले महीने फ्रांस में होने वाले भारत इनोवेट्स 2026 में प्रस्तुत किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अतीत में कार्बन कैप्चर के कई सफल प्रयोग हुए हैं, जिनमें कार्बन पृथक्करण के माध्यम से कार्बन का भंडारण किया गया था, लेकिन मूल्यवर्धन जैसी प्रमुख चुनौती को दूर कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड से कैल्शियम कार्बोनेट नामक एक उप-उत्पाद का उत्पादन होगा। इसका उपयोग चूने के विकल्प के रूप में इस्पात, पेंट, सीमेंट और आवास जैसे उद्योगों में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परियोजना को आने वाले दिनों में व्यावसायिक रूप से शुरू किया जाएगा।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अवसर पर आईआईटी बॉम्बे में भारत की पहली संपूर्ण कार्बन कैप्चर, यूटिलाइज़ेशन और स्टोरेज फील्ड प्रयोगशाला पायलट परियोजना का शुभारंभ भी हुआ। इसमें स्वदेशी रूप से विकसित कार्बन कैप्चर एंड यूटिलाइज़ेशन संयंत्र को दक्कन बेसाल्ट संरचनाओं में गहरे भंडारण के लिए जियोलॉजिकल कार्बन-डाई-ऑक्साइड सीक्वेस्ट्रेशन के साथ एकीकृत किया गया है। यह पहल आईआईटी बॉम्बे द्वारा पेटेंट की गई लागत प्रभावी जलीय कार्बन-डाई-ऑक्साइड कैप्चर तकनीक का उपयोग करके एक आत्मनिर्भर, बंद-लूप कार्बन न्यूनीकरण दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है। यह गैर-पेयजल का उपयोग करके परिवेशी वायु और औद्योगिक स्रोतों से उत्सर्जन को पकड़ने में सक्षम है।
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