मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत की तेजी से बदलती आकांक्षाओं के लिए एक ऐसे प्रशासनिक मॉडल की आवश्यकता है जो न केवल कुशल हो बल्कि नागरिक-केंद्रित भी हो। उन्होंने कर्मयोगी साधना सप्ताह को संबोधित करते हुए आज एक वीडियो संदेश में यह बात कही। वर्तमान शासन को ‘नागरिक देवो भव’ के मंत्र से निर्देशित बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इसका स्पष्ट उद्देश्य सार्वजनिक सेवा को अधिक सक्षम, संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित बनाना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि क्षमता निर्माण आयोग और मिशन कर्मयोगी प्रत्येक भारतीय की आकांक्षाओं के अनुरूप आधुनिक, समर्पित और उत्तरदायी कार्यबल तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी पर ही नहीं, बल्कि कुशल और प्रतिबद्ध मानव संसाधन पर भी होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन की सुगमता और गुणवत्ता में सुधार शासन का प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी राष्ट्र की शक्ति उसकी संस्थाओं की क्षमता में निहित होती है और उस क्षमता को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य एक उत्तरदायी, आधुनिक और जवाबदेह सार्वजनिक सेवा का निर्माण करना है जो प्रत्येक नागरिक को सशक्त बनाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सभी नागरिकों की आकांक्षाओं और सपनों को साकार करने में सहायता सुनिश्चित कर रही है। क्षमता निर्माण आयोग अपने स्थापना दिवस और मिशन कर्मयोगी के पांच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज से 8 अप्रैल तक कर्मयोगी साधना सप्ताह मना रहा है। इस दौरान केंद्रीय मंत्रालय, राज्य, केंद्रशासित प्रदेश और 250 से अधिक सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थान सहयोगात्मक क्षमता निर्माण के लिए एक साथ आएंगे।
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