मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना मधुमिता राउत का शनिवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से दिल्ली में निधन हो गया। वह 59 वर्ष की थीं। मधुमिता राउत के निधन से कला जगत में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार शनिवार दोपहर लोधी रोड श्मशान घाट पर किया गया, उनके भाई मनोज राउत ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर उनके परिजनों के साथ बड़ी संख्या में उनके प्रशसंक और कला प्रेमियों ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। मधुमिता राउत, ओडिसी नृत्य के पितामह कहे जाने वाले मायाधर राउत की पुत्री थीं। उनके भाई मनोज राउत के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं और दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं, जहां शनिवार सुबह छह बजकर 22 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ओडिसी नृत्य के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित थीं। इनमें भारत निर्माण अवार्ड (1997), ओडिशा स्टेट घुंघरू सम्मान (2010) और ओडिशा लिविंग लेजेंड अवार्ड (2011) प्रमुख हैं। मधुमिता राउत ने भारत के साथ-साथ आयरलैंड, नीदरलैंड, जर्मनी, बेल्जियम, हंगरी, आस्ट्रिया, स्पेन, मोरक्को, फ्रांस, पुर्तगाल, जापान और अमेरिका सहित कई देशों में अपनी प्रस्तुति से ओडिसी नृत्य को वैश्विक पहचान दिलाई थी। उनकी रचनाओं में साहित्य और नृत्य का अनूठा संगम देखने को मिलता था। उन्होंने जर्मन कवि गोएथे की कविताओं पर कोरियोग्राफिक प्रस्तुतियां दीं और नीदरलैंड में बाली की नृत्यांगना दिया तंत्री के साथ फ्यूजन नृत्य भी प्रस्तुत किया। उन्होंने नृत्य को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए ‘जयंतिका’ संस्था के माध्यम से ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण दिया। उनके ‘दीक्षा’ कार्यक्रम में हर वर्ष देश-विदेश की छात्राएं भाग लेती थीं। शिक्षा के क्षेत्र में भी वह अग्रणी रहीं।
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