भोपाल: श्रीमद् भागवत पुराण की कथा से जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है – आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी

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भोपाल: श्रीमद् भागवत पुराण की कथा से जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है- आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी

(म प्र): भोपाल के महर्षि विद्या मन्दिर, अयोध्या नगर में भक्ति भाव के साथ श्रीमद् भागवत कथा का प्रथम दिवस संपन्न हुआ। विद्वान् आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी के मार्गदर्शन में यह अत्यंत सफल उत्सव हो रहा है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए और कलश यात्रा के साथ मंगल प्रवेश हुआ। नित्य सायं 5:00 बजे से 7:00 तक यहां ज्ञान रस की धारा बहेगी। कथा में आज महात्म्य वर्णन हुआ: आचार्य जी ने बताया कि भावना में शक्ति है। श्रीमद् भागवत श्रवण से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के कष्टों का निवारण हुआ।

आचार्य जी ने बताया कि कथा के श्रवण से ही आत्म-कल्याण संभव है। महर्षि विद्या मंदिर के आचार्य एवं विद्यार्थियों के पारस्परिक सहयोग से विश्व शांति के लिए आयोजित इस सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आज भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सायंकाल में भव्य कलश यात्रा से हुआ जिसमें सैकड़ों की संख्या में पीत वस्त्र धारी महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर क्षेत्र का भ्रमण किया।

कथा का प्रारंभ एवं महात्म्य व्यास पीठ पर विराजमान प्रख्यात कथावाचक आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी ने विधिवत पूजन और आरती के साथ कथा का श्रीगणेश किया। प्रथम दिन की कथा में भागवत महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए महाराज श्री ने कहा कि भागवत साक्षात श्रीकृष्ण का शब्दमय स्वरूप है। संपूर्ण कार्यक्रम ब्रह्मचारी डॉ गिरीश जी के मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है। महर्षि विद्या मंदिर के प्राचार्य अशोक डेहरिया जी सहित समस्त स्टाफ आनंद का अनुभव कर रहे हैं एवं अयोध्या नगर के समस्त रहभासी अत्यंत भाव के साथ जुड़े हुए हैं।

भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का प्रसंग बहुत रोचक है। प्रथम दिवस के प्रसंग में नारद मोह और भक्ति देवी के दुख का वर्णन किया गया। श्री त्रिपाठी जी ने विस्तार से समझाया कि कैसे कलयुग के प्रभाव से ‘ज्ञान’ और ‘वैराग्य’ वृद्ध और अचेत हो गए थे, जिन्हें श्रीमद् भागवत के श्रवण मात्र से पुनः नवयौवन प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि जिस घर में भागवत का वाचन और श्रवण होता है, वहाँ दरिद्रता और क्लेश का वास नहीं होता।
श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही।

कथा के प्रथम दिन ही पाण्डाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। भजनों की धुनों पर भक्त झूमते नजर आए। कथा के अंत में महाआरती का आयोजन किया गया और सभी उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद वितरण हुआ।

कल का प्रसंग: द्वितीय दिवस की कथा में शुकदेव आगमन, राजा परीक्षित प्रसंग और सृष्टि वर्णन पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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