मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को ₹2.50 प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है, जिससे पेट्रोल निर्यात अब पूरी तरह कर-मुक्त हो गया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर शुल्क ₹3 प्रति लीटर बढ़ाकर ₹8.50 से ₹11.50 प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ के निर्यात पर शुल्क 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ाकर ₹10.50 से ₹11.00 प्रति लीटर कर दिया गया है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
आप को बता दे, सरकार का यह फैसला घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और रिफाइनरियों के निर्यात रुझान को संतुलित करने के उद्देश्य से लिया गया है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई और कीमतें ऊंची रहीं, जिससे रिफाइनरियों को घरेलू बाजार की बजाय विदेशी बाजार में अधिक मुनाफे की संभावना बनी। सरकार ने खुदरा स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, जबकि निर्यात शुल्क के जरिए ईंधन की विदेश भेजी जाने वाली मात्रा को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। इस फैसले का असर मुख्य रूप से निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर पड़ेगा, घरेलू खपत के लिए उपलब्ध पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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