मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की तटीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ बंदरगाह सुरक्षा ब्यूरो की स्थापना की प्रगति की समीक्षा की और कहा कि बंदरगाह सुरक्षा के लिए केवल लाइसेंस प्राप्त निजी सुरक्षा एजेंसियों को जिम्मेदारी दी जाए तथा तैनाती सिर्फ सीआईएसएफ प्रशिक्षित कर्मियों की हो।
आप को बता दे , गृह मंत्री ने मौजूदा ढांचे का उपयोग करते हुए बंदरगाह सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बंदरगाह सुरक्षा ब्यूरो के तहत तैनात होने वाले सभी सुरक्षा कर्मियों का व्यापक डेटाबेस बनाने को भी कहा। साथ ही उन्होंने बोपीएस ढांचे में आने वाले सभी बंदरगाहों पर कंटेनर स्कैनिंग सुविधाएं सुनिश्चित करने और विशाखापत्तनम, जवाहरलाल नेहरू तथा मुंद्रा बंदरगाहों पर प्रस्तावित सुरक्षा प्रबंधों का सीआईएसएफ से ट्रायल कराने के निर्देश दिए। उन्होंने मत्स्य पालन विभाग के साथ मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों और फिश लैंडिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की। गृह मंत्री ने इसरो विकसित ‘नभमित्र’ ऐप को अधिक व्यापक रूप से प्रचारित करने, मछुआरों के पंजीकरण की प्रक्रिया सरल करने तथा जिला पुलिस अधीक्षकों को फिश लैंडिंग सेंटरों पर स्थायी पुलिस कर्मियों की तैनाती से पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बंदरगाह सुरक्षा ब्यूरो, मर्चेंट शिपिंग अधिनियम 2025 की धारा 13 के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में गठित किया जा रहा है।
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