मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को नारियल प्रोत्साहन योजना पर राष्ट्रीय हितधारकों की बैठक का उद्घाटन किया और किसानों से बातचीत की। इस दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि नारियल प्रोत्साहन योजना में इस क्षेत्र की प्रमुख संरचनात्मक चुनौतियों से निपटने के लिए एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण की परिकल्पना की गई है। इसमें घटती उत्पादकता, पुराने और कमजोर बागान, कीट और रोगों का प्रकोप, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की कमी और सीमित मूल्यवर्धन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत प्रस्तावित प्रमुख उपायों में गुणवत्तापूर्ण नारियल के पौधों का बड़े पैमाने पर उत्पादन, संभावित क्षेत्रों में नारियल की खेती का विस्तार, बंजर और अनुत्पादक बागानों का चरणबद्ध पुनर्रोपण और पुनरुद्धार, समग्र फसल स्वास्थ्य प्रबंधन पद्धतियों को अपनाना और मूल्यवर्धन तथा निर्यात को मजबूत करने के लिए एकीकृत नारियल प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना शामिल है। सम्मेलन के दौरान, राज्य सरकारों ने रणनीतियां और उपाय प्रस्तुत किए, जिसके बाद किसानों, परिवारिक संगठनों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय सहमति बनाना, केंद्र-राज्य समन्वय को बढ़ावा देना और नारियल प्रोत्साहन योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए हितधारकों की भागीदारी को बढाना था। इसका व्यापक लक्ष्य 2030 तक भारत को नारियल और नारियल के रेशे से बने उत्पादों के निर्यात में अग्रणी बनाना है। साथ ही, नारियल किसानों के लिए उच्च आय और स्थिरता सुनिश्चित करना है। सम्मेलन में एक हजार से अधिक किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और नीतिगत हितधारकों ने भाग लिया।
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